Edited By Swati Sharma, Updated: 20 Feb, 2026 04:23 PM

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत केंद्र सरकार से मिले बजट के 'दुरुपयोग' का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। विधानसभा बजट सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने खुलासा किया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय मिशन के पैसों का...
Shimla News: हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत केंद्र सरकार से मिले बजट के 'दुरुपयोग' का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। विधानसभा बजट सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने खुलासा किया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय मिशन के पैसों का इस्तेमाल पाइपलाइन बिछाने के बजाय मंडी जिले के धर्मपुर और सराज विधानसभा क्षेत्रों में आलीशान विश्राम गृह बनाने पर कर दिया गया। इस अनियमितता के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश की करोड़ों की राशि रोक दी है।
धर्मपुर और सराज में खर्चे 37.85 करोड़
बुधवार को सदन में धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर के सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जल जीवन मिशन के नियमों को ताक पर रखकर पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह के निर्वाचन क्षेत्र धर्मपुर में 12 और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के क्षेत्र सराज में 7 विश्राम गृह (रेस्ट हाउस व किसान भवन) बनाए गए। इन भवनों पर कुल 37.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए। केंद्र सरकार ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बजट देने से मना कर दिया है और स्पष्ट कहा है कि यह राशि अब राज्य सरकार को अपने खजाने से भरनी होगी।
"मुफ्त पानी बंद करो, बिल वसूलना शुरू करो"
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बजट दुरुपयोग के कारण केंद्र ने प्रदेश की 1227 करोड़ रुपये की राशि लंबित रखी है। इस बजट को जारी करने के लिए केंद्र ने अब हिमाचल सरकार के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं। एक ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्क पानी की योजना बंद की जाए। दूसरी सामान्य परिवारों से 100 रुपये और कम आय वाले परिवारों से 30 रुपये मासिक बिल वसूला जाए। साथ ही मिशन के तहत कार्य केवल पानी के टैंक तक ही सीमित रखा जाए।
अब बिना कैबिनेट मंजूरी के नहीं बनेगा विश्राम गृह
सरकार ने भविष्य के लिए कड़ा निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि अब जलशक्ति विभाग में किसी भी विश्राम गृह का निर्माण बिना कैबिनेट की अनुमति के नहीं किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वे लंबित राशि के लिए केंद्रीय मंत्री से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन बजट दुरुपयोग और मुफ्त पानी की योजना पर केंद्र का रुख काफी सख्त है।