Edited By Vijay, Updated: 28 Feb, 2026 10:00 AM

हिमाचल प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वार्षिक पक्षी गणना कार्यक्रम ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काऊंट (जीबीबीसी 2026) में इस वर्ष कुल 357 पक्षी प्रजातियां रिकॉर्ड की गईं, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती हैं।
शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वार्षिक पक्षी गणना कार्यक्रम ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काऊंट (जीबीबीसी 2026) में इस वर्ष कुल 357 पक्षी प्रजातियां रिकॉर्ड की गईं, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती हैं। इससे पहले वर्ष 2024 में 322 प्रजातियां तथा वर्ष 2025 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वार्षिक पक्षी गणना पक्षियों की 326 प्रजातियां रिकाॅर्ड की गई थीं। भारत में आयोजित इस गणना अभियान में 1090 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें से 357 प्रजातियां अकेले हिमाचल प्रदेश में पाई गईं। इस उपलब्धि के साथ हिमाचल प्रदेश को देशभर में 8वां स्थान प्राप्त हुआ। इसके अलावा प्रदेश सभी 12 जिलों में पक्षी गणना करवाने वाला देश का पहला राज्य बना।
यह कार्यक्रम 13 से 16 फरवरी तक विश्वभर में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को पक्षी गणना से जोड़ना तथा जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। प्रदेश में यह आयोजन वन विभाग हिमाचल प्रदेश, ई. बर्ड इंडिया और बर्ड काऊंट इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में 12 जिलों में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में 180 से अधिक वन अधिकारियों, जीवविज्ञानियों, पक्षी विशेषज्ञों, महाविद्यालयों के विद्यार्थियों और स्थानीय पक्षी प्रेमियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रतिभागियों ने प्रदेश के विभिन्न बर्डिंग हॉटस्पॉट्स में जाकर पक्षियों का अवलोकन किया और प्रजातियों का विवरण ई. बर्ड पोर्टल पर दर्ज किया। जीबीबीसी 2026 के ई. बर्ड समन्वयक संतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि प्रदेश पिछले 10 वर्षों से इस कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है और अब तक ई. बर्ड के माध्यम से 640 पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं।
प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) एवं चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आर. लालूनसांगा ने कहा कि जीबीबीसी जैसे कार्यक्रम आम लोगों को प्रकृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे न केवल पक्षियों की स्थिति समझने में मदद मिलती है, बल्कि संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास भी मजबूत होते हैं। वहीं अरण्यपाल, वन्यप्राणी वृत्त शिमला दक्षिण, प्रीति भंडारी ने सभी समन्वयकों और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि सामूहिक भावना से किए गए प्रयास ही संरक्षण की सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से वन्यप्राणी संरक्षण में निरंतर सहयोग का आह्वान किया।
सिरमौर में अधिक और लाहौल-स्पिति में सबसे कम प्रजातियां
हिमाचल प्रदेश में पक्षियों की सबसे अधिक प्रजातियां जिला सिरमौर में तथा सबसे कम प्रजातियां जिला लाहौल-स्पिति में पाई गई हैं। जिला सिरमौर में पक्षियों की 192 तथा जिला लाहौल-स्पिति में 38 प्रजातियां पाई गई हैं। इसके अलावा पक्षियों की जिला कांगड़ा में 257, चम्बा में 142, मंडी में 130, सोलन में 128, हमीरपुर में 95, शिमला में 93, कुल्लू में 92, बिलासपुर में 82, ऊना में 70 तथा जिला किन्नौर में पक्षियों की 54 प्रजातियां रिकाॅर्ड की गई हैं।
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