हिमाचल High Court को बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी एजेंसियां

Edited By Jyoti M, Updated: 08 Jan, 2026 12:50 PM

himachal high court receives bomb threat

जहां न्याय की उम्मीद में प्रदेश भर से लोग पहुंचते हैं, उस 'न्याय के मंदिर' को एक बार फिर दहलाने की साजिश रची गई। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय को गुरुवार सुबह एक अज्ञात ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई। इस संदेश ने राजधानी शिमला के प्रशासनिक...

हिमाचल डेस्क। जहां न्याय की उम्मीद में प्रदेश भर से लोग पहुंचते हैं, उस 'न्याय के मंदिर' को एक बार फिर दहलाने की साजिश रची गई। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय को गुरुवार सुबह एक अज्ञात ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई। इस संदेश ने राजधानी शिमला के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए।

सुरक्षा चक्र हुआ सख्त, चप्पे-चप्पे की हुई छानबीन

धमकी भरा संदेश मिलने के तुरंत बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां हरकत में आ गईं। कोर्ट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच निम्नलिखित कदम उठाए गए:

सर्च ऑपरेशन: बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड ने पूरे कोर्ट परिसर की बारीकी से तलाशी ली।

एहतियात: अदालती कार्रवाई और सुरक्षा को देखते हुए हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी गई।

जांच का नतीजा: घंटों चले गहन सर्च अभियान के बाद भी पुलिस को कोई भी संदेहास्पद वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली।

जांच के घेरे में 'डिजिटल थ्रेट'

शिमला के पुलिस अधिकारी संजीव कुमार गांधी ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि जैसे ही हाईकोर्ट प्रशासन ने इस ईमेल के बारे में जानकारी दी, तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया। पुलिस अब उस आईपी एड्रेस और ईमेल आईडी को ट्रैक करने में जुटी है जिसके जरिए यह दहशत फैलाने की कोशिश की गई है।

महत्वपूर्ण तथ्य: यह पहली बार नहीं है जब प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत को इस तरह का डराने वाला संदेश मिला हो। इससे पहले भी इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं, जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल उच्च न्यायालय परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और पुलिस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की शरारत या साजिश करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों की पहचान के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

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