Edited By Swati Sharma, Updated: 19 Apr, 2026 11:24 AM

Shimla News : हिमाचल प्रदेश सरकार ने मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों के वेतन के एक हिस्से को छह महीने की अवधि के लिए अस्थायी रूप से टालने की अधिसूचना जारी की है।
Shimla News : हिमाचल प्रदेश सरकार ने मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों के वेतन के एक हिस्से को छह महीने की अवधि के लिए अस्थायी रूप से टालने की अधिसूचना जारी की है।
'मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा टाला जाएगा'
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इससे पहले राज्य विधानसभा में बजट पेश करते समय वित्तीय संकट के मद्देनजर वेतन टालने की घोषणा की थी। सामान्य प्रशासन विभाग (संसदीय कार्य) द्वारा शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा टाला जाएगा, जबकि उपमुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा रोककर रखा जाएगा। विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा टाला जाएगा।
'स्थगित की गई राशि को कटौती के रूप में नहीं माना जाएगा'
आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि स्थगित की गई राशि को कटौती के रूप में नहीं माना जाएगा और राज्य की वित्तीय स्थिति के आधार पर इसे बाद के चरण में जारी किया जाएगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, सरकार ने निर्देश दिया है कि भुगतान योग्य और स्थगित दोनों हिस्सों को ई-वेतन प्रणाली और वेतन पर्चियों में दर्शाया जाएगा। आयकर और अन्य वैधानिक कटौतियां पूरे वेतन पर ही गणना की जाती रहेंगी।
अधिसूचना में कहा गया है कि जिन मामलों में मकान निर्माण या मोटर कार ऋण जैसे अग्रिमों का पुनर्भुगतान किया जा रहा है, वहां स्थगन की गणना ऐसी किस्तों को समायोजित करने के बाद की जाएगी। यह ड्राइंग और संवितरण अधिकारी (डीडीओ) को प्रस्तुत किए गए एक वचनपत्र के अधीन होगा। यह निर्णय व्यय प्रबंधन उपायों के एक हिस्से के रूप में लिया गया है, जिसमें सरकार ने संकेत दिया है कि वित्तीय स्थिति में सुधार होने पर स्थगित वेतन का वितरण कर दिया जाएगा।
प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें