Edited By Jyoti M, Updated: 19 Mar, 2026 01:20 PM

हिमाचल प्रदेश की सियासत इन दिनों न केवल सदन के भीतर गर्मा रही है, बल्कि इसकी आंच विधानसभा की रसोई तक भी पहुँच गई है। शिमला में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के अचानक आए संकट ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसकी कल्पना आधुनिक दौर में कम ही की जाती है।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की सियासत इन दिनों न केवल सदन के भीतर गर्मा रही है, बल्कि इसकी आंच विधानसभा की रसोई तक भी पहुँच गई है। शिमला में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के अचानक आए संकट ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसकी कल्पना आधुनिक दौर में कम ही की जाती है। विधायकों के लिए अब गैस के बर्नर पर नहीं, बल्कि लकड़ियों के चूल्हे पर भोजन तैयार हो रहा है।
आधुनिकता पर भारी पड़ रही परंपरा
विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर में कमर्शियल गैस की किल्लत इतनी बढ़ गई है कि कैटरिंग का जिम्मा संभाल रहे रसोइयों के पास लकड़ियाँ जलाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। कल से शुरू हुए सत्र में सैकड़ों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था पारंपरिक तरीके से की जा रही है।
शिमला के प्रतिष्ठित होटल हॉलीडे होम और पीटरहॉफ, जो विधानसभा के खान-पान की कमान संभालते हैं, वहां इन दिनों गैस की नीली लौ की जगह लकड़ी का धुआं नजर आ रहा है। आपूर्ति ठप होने की वजह से निगम ने भारी मात्रा में लकड़ियां खरीदी हैं। रसोइयों का मानना है कि इतनी बड़ी तादाद में खाना तैयार करना लकड़ी पर चुनौतीपूर्ण तो है ही, साथ ही इसमें मेहनत और लागत दोनों दोगुनी हो रही है।
बजट सत्र का यह सिलसिला आगामी 2 अप्रैल तक चलने वाला है। अगर शहर में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई चैन जल्द दुरुस्त नहीं होती, तो पूरे सत्र के दौरान माननीयों को चूल्हे पर बना 'देसी स्वाद' ही चखना पड़ेगा।