पोंग डैम में अवैध खेती और शिकार पर High Court सख्त, अफसरों को फटकार, अब ड्रोन रखेंगे नजर

Edited By Jyoti M, Updated: 10 Jan, 2026 11:15 AM

high court cracks down on  destruction of nature  at pong dam

पोंग डैम वेटलैंड और वन्यजीव अभयारण्य में लंबे समय से चल रही प्रकृति की खुलेआम लूट पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आखिरकार कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने साफ शब्दों में माना कि वन विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खेती,...

रैहन, (दुर्गेश कटोच)। पोंग डैम वेटलैंड और वन्यजीव अभयारण्य में लंबे समय से चल रही प्रकृति की खुलेआम लूट पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आखिरकार कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने साफ शब्दों में माना कि वन विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खेती, बाड़बंदी, अतिक्रमण और यहां तक कि विस्फोटक पदार्थों से वन्यजीवों का शिकार तक किया जा रहा है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने CWPIL संख्या 46/2024 सहित इससे जुड़े पुराने जनहित मामलों (CWPIL 19/2017, 53/2024 और 84/2024) की सुनवाई के दौरान 7 जनवरी 2026 को पारित किया।

मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाजकी खंडपीठ ने उपायुक्त कांगड़ा और वन्यजीव वन संरक्षक को आड़े हाथों लेते हुए आदेश दिए कि वेटलैंड क्षेत्र से सभी अवैध बाड़बंदियां तुरंत हटाई जाएं, फसलों को नष्ट किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में यहां एक इंच जमीन पर भी खेती न हो।

अदालत के समक्ष पेश तस्वीरों ने पूरे तंत्र की पोल खोल दी। बताया गया कि पक्षियों और जानवरों को लुभाने के लिए खाने में विस्फोटक मिलाकर शिकार किया जा रहा है, जिससे न केवल वन्यजीव बल्कि मवेशी भी मौत का शिकार हो रहे हैं। यह वही पोंग डैम है, जहां हर साल रूस समेत उत्तरी गोलार्ध से हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं, लेकिन अफसरों की आंखों के सामने उनका आशियाना उजाड़ा जा रहा था।

हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि वेटलैंड किसी की निजी जागीर नहीं है। जो लोग यहां खेती कर रहे हैं, वे सीधे तौर पर अतिक्रमणकारी हैं और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने यह भी सख्त निर्देश दिए कि कोई भी सिविल कोर्ट ऐसे लोगों को संरक्षण देते हुए स्थगन आदेश जारी नहीं करेगा, जिससे वर्षों से चल रही अवैध गतिविधियों पर न्यायिक ढाल लगाई जाती रही है।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने निर्देश दिए कि अब ड्रोन से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जाए और अगली सुनवाई में स्थिति रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी।

हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद बड़ा सवाल यह है कि अब तक सोया हुआ प्रशासन जागेगा या फिर पोंग डैम यूं ही अफसरशाही की लापरवाही की भेंट चढ़ता रहेगा?

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