Edited By Jyoti M, Updated: 23 Feb, 2026 01:35 PM

जब प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वाले सिंडिकेट चैन की नींद सो रहे थे, ठीक उसी वक्त पुलिस की विशेष टुकड़ियों ने ब्यास नदी के तटों को घेर लिया। पुलिस जिला नूरपुर ने बीते 24 घंटों के भीतर अवैध खनन के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक बड़ा 'क्रैकडाउन' किया है।
हिमाचल डेस्क। जब प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वाले सिंडिकेट चैन की नींद सो रहे थे, ठीक उसी वक्त पुलिस की विशेष टुकड़ियों ने ब्यास नदी के तटों को घेर लिया। पुलिस जिला नूरपुर ने बीते 24 घंटों के भीतर अवैध खनन के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक बड़ा 'क्रैकडाउन' किया है। यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि धरातल पर भारी मशीनों और वाहनों की धरपकड़ के रूप में नजर आई।
एक्शन मोड में कप्तान: आधी रात को नदी तट पर दी दबिश
इस विशेष ऑपरेशन की कमान किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं पुलिस अधीक्षक (SP) ने संभाली। उनके नेतृत्व में जिले के तमाम राजपत्रित अधिकारियों की टीमों ने ब्यास नदी के दुर्गम क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। इस दौरान न केवल अवैध रूप से चल रहे स्टोन क्रशरों की बारीकी से जांच की गई, बल्कि हर उस संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी गई जो कानून की आंखों में धूल झोंक रही थी।
अवैध खनन के माफियाओं को मात देने के लिए पुलिस ने इस बार बेहद कड़ा रुख अपनाया है। खन्नी, माजरा, रेय पत्तन और इंदौरा मंड जैसे संवेदनशील इलाकों में न केवल गश्त बढ़ाई गई है, बल्कि तस्करी के गुप्त रास्तों को भी हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। रेय पत्तन और रेहटपुर बेल्ट के संपर्क मार्गों पर गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं, ताकि अवैध सामग्री ढोने वाले वाहन इन रास्तों का उपयोग न कर सकें। मुख्य मार्गों और गुप्त रास्तों पर पुलिस की तैनाती चौबीसों घंटे सुनिश्चित कर दी गई है।
कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड: 21 वाहन जब्त
पिछले एक दिन की धुआंधार छापेमारी में पुलिस ने अवैध परिवहन में शामिल कुल 21 वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया है। इसमें भारी-भरकम ट्रक, डंपर और ट्रैक्टर शामिल हैं। माइनिंग एक्ट के तहत इन सभी पर शिकंजा कसा गया है और मामलों को आगामी कानूनी प्रक्रिया के लिए अदालत में पेश कर दिया गया है।
भविष्य की चेतावनी: 'जीरो टॉलरेंस' ही अंतिम विकल्प
नूरपुर पुलिस प्रशासन ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की रक्षा और कानून का शासन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति लागू रहेगी। पुलिस का संदेश साफ है—चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, यदि वह प्राकृतिक संसाधनों की लूट में शामिल पाया गया, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।