Edited By Vijay, Updated: 05 Apr, 2025 06:56 PM

बाथू की लड़ी में कहीं मधुमक्खियों तो कहीं रंगड़ों के कहर से पर्यटकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। पर्यटक जब मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं तो उससे पहले बाहर मधुमक्खियों ने बसेरा बनाया हुआ है।
ज्वाली। बाथू की लड़ी में कहीं मधुमक्खियों तो कहीं रंगड़ों के कहर से पर्यटकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। पर्यटक जब मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं तो उससे पहले बाहर मधुमक्खियों ने बसेरा बनाया हुआ है। कई पर्यटकों पर ये हमला भी कर चुकी हैं। पर्यटक मंदिर में प्रवेश करने से पहले ही खतरा महसूस कर रहे हैं। लेकिन हैरानी भरी बात यह है कि इनको यहां से खदेड़ने की जिम्मेदारी वन्यजीव विंग की तरफ से कोई नहीं ले रहा। उससे भी बड़ी लापरवाही यह है कि वन्यजीव विंग के अंडर काम करने वाले बाऊचरमैन यह जानते भी हैं, लेकिन मधुमक्खियों को खदेड़ने या फिर उसके बारे अपने ऊपरी अधिकारियों को बताना जरूरी नहीं समझा।
बाऊचरमैन का बयान-कुछ भी होता...हम जिम्मेदार नहीं
वहीं जब इस मामले पर बाउचरमैन चमेल सिंह से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मधुमक्खियों के काटने से किसी की जान पर खतरा बनता है तो क्या सरकार की जवाबदेही नहीं रहेगी। अब सवाल यह है कि अगर पर्यटकों की सुरक्षा का ख्याल सरकार नहीं रख पा रही है तो फिर बाथू की लड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में क्यों बढ़ावा दे रही और क्यों ही इतनी जल्दी प्रवेश शुल्क वसूलने बैठ गए हैं।
यहां देखें वीडियो
बता दें कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग ने एक महीने पहले ही प्रवेश शुल्क वसूलना शुरू किया था, जिसका स्थानिय लोगों ने भी विरोध किया था। कई पर्यटकों का कहना है कि सरकार द्वारा न ही कोई सुविधाएं दी गई हैं और न ही सुरक्षा को लेकर प्रबंध हैं। प्रत्येक कार की 100 रुपए पर्ची काटी जा रही है। बस के प्रवेश पर 200 रुपए की पर्ची है। वहीं एक पर्यटक की एंट्री 10 रुपए रखी गई है।
हिमाचल की खबरें Twitter पर पढ़ने के लिए हमें Join करें Click Here
अपने शहर की और खबरें जानने के लिए Like करें हमारा Facebook Page Click Here
हिमाचल प्रदेश की खबरें पढ़ने के लिए हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें Click Here