Edited By Vijay, Updated: 04 Jan, 2026 01:35 PM

हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। अब प्रदेश में पीएम किसान सम्मान निधि सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
शिमला (ब्यूराे): हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। अब प्रदेश में पीएम किसान सम्मान निधि सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए सभी पात्र लाभार्थियों को आधार आधारित ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
एग्रीस्टेक पहल के तहत बन रही यूनिक आईडी
कृषि विभाग के निदेशक डॉ. रविंद्र जसरोटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार की एग्रीस्टेक पहल के तहत प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से सही किसानों तक पहुंचाना है। इस प्रोजैक्ट के तहत प्रदेश के हर किसान और बागवान की एक यूनिक आईडी तैयार की जा रही है।
आईडी बनने के बाद इन योजनाओं का मिलेगा लाभ
एक बार फार्मर आईडी जनरेट हो जाने के बाद किसान केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के उठा सकेंगे। इनमें मुख्य रूप से पीएम किसान सम्मान निधि योजना, फसल बीमा और अनुदान, बीज और उर्वरक (खाद) पर सबसिडी और सिंचाई और प्राकृतिक खेती से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
घर बैठे ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
- किसान स्वयं अपने मोबाइल या कम्प्यूटर से घर बैठे फार्मर आईडी बना सकते हैं।
- गूगल पर 'Farmer Registry Himachal Pradesh' सर्च करें या सीधे आधिकारिक वैबसाइट पर जाएं।
- वैबसाइट पर मौजूद एनआईसी (NIC) डैशबोर्ड पर 'Farmer' विकल्प पर क्लिक करें।
- अपना यूजर अकाऊंट बनाएं (Create User Account)।
- अपनी भूमि और कृषि से जुड़ी जानकारियां भरें और फॉर्म सबमिट करें।
- सत्यापन (Verification) पूरा होने के बाद आपकी फार्मर आईडी जारी कर दी जाएगी।
लोकमित्र केंद्र में निःशुल्क सुविधा उपलब्ध
जिन किसानों को ऑनलाइन आवेदन करने में कठिनाई हो रही है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे अपने नजदीकी लोकमित्र केंद्र में जाकर अपनी फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार लोकमित्र केंद्रों पर यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क है और वहां तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि या बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।