Himachal : बड़ी लापरवाही! सरकारी स्कूलों में 36 दिन बाद भी बच्चों को नहीं मिली किताबें, छात्र और शिक्षक परेशान

Edited By Swati Sharma, Updated: 20 Mar, 2026 01:33 PM

even after 36 days children in himachal government schools have not received

Shimla News : हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 35 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन हजारों छात्र अभी भी मुख्य पाठ्य पुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं। एक तरफ विभाग ने 'पहले दिन से नियमित पढ़ाई' के सख्त आदेश जारी किए थे,...

Shimla News : हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 35 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन हजारों छात्र अभी भी मुख्य पाठ्य पुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं। एक तरफ विभाग ने 'पहले दिन से नियमित पढ़ाई' के सख्त आदेश जारी किए थे, वहीं दूसरी तरफ 20 मार्च तक भी छठी से नौवीं कक्षा के छात्रों को किताबें मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं।

फरमान सख्त, धरातल पर तैयारी शून्य

शिक्षा निदेशालय ने फरवरी के पहले सप्ताह में आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि विंटर क्लोजिंग स्कूलों में 12 फरवरी से नियमित कक्षाएं शुरू होनी चाहिए और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डिप्टी डायरेक्टर और ब्लॉक अफसरों को औचक निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि बिना किताबों के छात्र पढ़ाई कैसे करें?

सराहां और शिमला में स्थिति सबसे गंभीर

प्रदेश के कई ब्लॉकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सिरमौर के सराहां ब्लॉक में छठी से नौवीं कक्षा की 11 किताबें अभी तक स्कूलों में नहीं पहुंची हैं। इसमें छठी की 2 और सातवीं, आठवीं व नौवीं की 3-3 किताबें शामिल हैं। वहीं, प्रदेश की राजधानी शिमला के स्कूलों में भी आठवीं की भूगोल और नौवीं की साइंस जैसी महत्वपूर्ण किताबें गायब हैं। शिक्षक बिना किताबों के छात्रों को पढ़ाने पर मजबूर हैं, जिससे पाठ्यक्रम पिछड़ने का डर बना हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि बिना किताबों के पढ़ाई करवाना बेहद कठिन हो रहा है।

जानें बोर्ड के सचिव ने क्या कहा?

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला, जो इन किताबों की छपाई का जिम्मा संभालता है, ने देरी के पीछे तकनीकी कारणों का हवाला दिया है। बोर्ड के सचिव डॉ. विशाल शर्मा ने बताया, "टेंडर प्रक्रिया में कुछ अड़चनें आने के कारण छपाई में देरी हुई है, जिसकी सूचना सरकार को दे दी गई थी। लगभग 90% किताबें वितरित की जा चुकी हैं और 25 मार्च तक शेष सभी किताबें स्कूलों तक पहुंच जाएंगी।"

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