आम जनता पर महंगाई की मार! हिमाचल में अप्रैल से महंगी हो सकती है बिजली, बोर्ड ने नियामक आयोग के सामने रखा ये प्रस्ताव

Edited By Swati Sharma, Updated: 28 Feb, 2026 01:30 PM

electricity may become expensive in himachal

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बिजली की नई दरों को लेकर मंथन तेज हो गया है। राज्य विद्युत बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है। यदि आयोग इस प्रस्ताव को हरी झंडी...

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बिजली की नई दरों को लेकर मंथन तेज हो गया है। राज्य विद्युत बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है। यदि आयोग इस प्रस्ताव को हरी झंडी देता है, तो आगामी 1 अप्रैल, 2026 से प्रदेश के उपभोक्ताओं को अधिक बिल चुकाना पड़ सकता है।

क्यों बढ़ाई जा रही हैं दरें?

विद्युत बोर्ड ने आयोग को दी गई प्रस्तुति में तर्क दिया है कि प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उन्हें महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। खरीद लागत और राजस्व के अंतर को पाटने के लिए बोर्ड ने प्रति यूनिट अधिकतम 25 पैसे की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, जबकि न्यूनतम 10 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि प्रस्तावित की गई है।

सहमति और विरोध के बीच सुनवाई

इस प्रस्तावित वृद्धि को लेकर राज्य विद्युत बोर्ड, पावर कॉरपोरेशन, ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के साथ-साथ शिमला होटल एसोसिएशन और अन्य व्यापारिक संस्थाओं ने भी आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा है। नियामक आयोग ने अपनी वैधानिक प्रक्रिया के तहत अब तक शिमला, धर्मशाला और बद्दी में जनसुनवाई पूरी कर ली है।

अप्रैल से लागू हो सकती हैं नई दरें

बोर्ड की याचिका पर नियामक आयोग मार्च के अंत तक अपना अंतिम फैसला घोषित कर सकता है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगी। इस बढ़ोतरी के पीछे एक बड़ा कारण सरकार की बदली हुई नीति भी है। पहले हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) से 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में निःशुल्क बिजली मिलती थी। अब राज्य सरकार ने इस हिस्सेदारी की बिजली को बोर्ड को देने के बजाय खुले बाजार में बेचने का निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम से उसे तो अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, लेकिन बोर्ड पर बिजली खरीद का वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है, जिसे पूरा करने के लिए अब उपभोक्ताओं पर भार डालने की तैयारी है।

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