Edited By Vijay, Updated: 05 Apr, 2025 11:59 AM

हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हस्ताक्षर से फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने का मामला सामने आया है....
शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हस्ताक्षर से फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने का मामला सामने आया है, जिससे यह आशंका गहराती जा रही है कि विभाग में इस तरह के और भी फर्जी पत्र जारी किए गए हो सकते हैं। मामले की शिकायत छोटा शिमला पुलिस थाना में दर्ज करवाई गई है और पुलिस ने बीएनएस की धारा 319(2), 318(4), 336(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला जोगी राम अत्री पुत्र सुंदर सिंह की शिकायत पर दर्ज हुआ है, जो वर्तमान में उपसचिव (कृषि) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 19 मार्च को उन्हें कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कार्यालय धर्मशाला से व्हाट्सएप पर जानकारी प्राप्त हुई कि एक व्यक्ति अनीश कुमार पुत्र खेम राज, निवासी गांव व डाकघर जमानाबाद, तहसील कांगड़ा, जिला कांगड़ा के नाम से उनके हस्ताक्षरयुक्त एक नियुक्ति पत्र सामने आया है। यह पत्र राहुल कटोच संयुक्त निदेशक ने सत्यापन के लिए भेजा था। यह पत्र उन्हें एक ठेकेदार अमित जोकि कृषि विभाग में बोर वैल का काम कर रहा है, ने सत्यापित करने के लिए दिया था।
शिकायत में कहा गया है कि यह पत्र पूरी तरह से फर्जी और विभागीय प्रक्रियाओं के विरुद्ध था। पत्र में विभाग के निदेशालय, कृषि भवन बालूगंज, शिमला की मोहर लगी थी, जबकि इस प्रकार के पत्रों में ऐसी मोहर का प्रयोग नहीं किया जाता। साथ ही, पत्र में अंत में हस्ताक्षर भी किए गए थे, जो निदेशालय के पत्राचार प्रणाली के अनुरूप नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस फर्जी पत्र में जोगी राम अत्री को अवर सचिव (कृषि) के रूप में दर्शाया गया है, जबकि उनका पदोन्नति आदेश 1 नवंबर 2024 को जारी हो चुका है और वह उपसचिव (कृषि) के पद पर कार्यरत हैं।
फर्जी पत्र में अनीश कुमार को लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) पद पर नियमित नियुक्ति देने की बात कही गई है, जबकि कृषि विभाग में ऐसा कोई पद अस्तित्व में नहीं है। वर्तमान में यह पद जूनियर ऑफिस असिस्टैंट (आईटी) के रूप में स्वीकृत है और राज्य सरकार वर्ष 2007 से तृतीय श्रेणी की भर्तियां अनुबंध आधार पर ही करती रही है।
जोगी राम अत्री ने इस संदर्भ में 22 मार्च को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) को भी पत्र लिखकर अवगत करवाया था, लेकिन जब वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने छोटा शिमला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता अधिकारी ने आशंका जताई है कि इस प्रकार के और भी फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए गए हो सकते हैं। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि यह मामला सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी और धोखाधड़ी से जुड़ा है। पुलिस अब इस फर्जीवाड़े में संलिप्त सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है। वहीं कृषि विभाग ने भी आंतरिक स्तर पर जांच बिठा दी है।
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