Edited By Vijay, Updated: 03 Jan, 2026 12:42 PM

जिला उपभोक्ता विवाद आयोग कांगड़ा ने मुख्यमंत्री नूतन पॉलीहाऊस परियोजना के तहत लगाए गए पॉलीहाऊस में घटिया सामग्री उपयोग करने के मामले में एमएस ग्रीन टैक एग्री सैक्टर प्राइवेट लिमिटेड को दोषी ठहराया है।
धर्मशाला (ब्यूरो): जिला उपभोक्ता विवाद आयोग कांगड़ा ने मुख्यमंत्री नूतन पॉलीहाऊस परियोजना के तहत लगाए गए पॉलीहाऊस में घटिया सामग्री उपयोग करने के मामले में एमएस ग्रीन टैक एग्री सैक्टर प्राइवेट लिमिटेड को दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी पर भारी जुर्माना लगाते हुए किसान को मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
आयोग के समक्ष दायर उपभोक्ता शिकायत में शाहपुर निवासी आशीष सागर ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन पर लगाए गए पॉलीहाऊस में घटिया क्वालिटी की पॉलीशीट और सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे पहली ही बारिश और तेज हवाओं में पॉलीशीट फट गई और खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ और राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि पॉलीहाऊस में प्रयुक्त पॉलीशीट की मोटाई और मजबूती सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं थी।
जांच में पाया गया कि जिस पॉलीशीट को 200 माइक्रोन बताया गया था, उसकी वास्तविक मोटाई लगभग आधी पाई गई, जिससे यह घटिया और मानकों से कमतर साबित हुई। ग्रीन टैक एग्री सैक्टर की ओर से प्राकृतिक आपदा को नुक्सान का कारण बताया गया, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि कंपनी ने न केवल घटिया सामग्री का प्रयोग किया, बल्कि वारंटी अवधि में मुरम्मत और शीट बदलने में भी लापरवाही बरती, जो सेवा में गंभीर कमी है।
उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में ग्रीन टैक एग्री सैक्टर को निर्देश दिए कि कंपनी सरकार द्वारा जारी की गई 18,74,658 रुपए की सबसिडी राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित कृषि विभाग को लौटाए। शिकायतकर्त्ता किसान आशीष सागर को 5 लाख रुपए मुआवजा अदा करे। इसके अतिरिक्त 3 लाख रुपए दंडात्मक हर्जाना और 20 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में चुकाए।
मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 90 व 91 के तहत मामला दर्ज करने के लिए पुलिस अधीक्षक कांगड़ा को आदेश भेजने के निर्देश भी दिए। वहीं आयोग ने कृषि विभाग के अधिकारियों को भविष्य में पॉलीहाऊस निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता की सख्ती से जांच सुनिश्चित करने और अन्य किसानों की शिकायतों के नमूनों को भी फोरैंसिक जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।