Edited By Kuldeep, Updated: 10 Feb, 2026 06:11 PM

प्रदेश की आर्थिक सेहत को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों के मध्य शांता कुमार ने कहा कि छोटे से हिमाचल प्रदेश का शासन ईमानदारी, बचत और समझदारी से चलता है। राजनीति में निहित स्वार्थ और सरकार गलत निर्णय करती जा रही है।
पालमपुर (भृगु): प्रदेश की आर्थिक सेहत को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों के मध्य शांता कुमार ने कहा कि छोटे से हिमाचल प्रदेश का शासन ईमानदारी, बचत और समझदारी से चलता है। राजनीति में निहित स्वार्थ और सरकार गलत निर्णय करती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज का हिमाचल का आर्थिक संकट गलत योजना, फिजूलखर्ची, भारी भरकम प्रशासन और बचत का बिल्कुल न होना है। शांता कुमार ने कहा कि सबसे बड़ा उदाहरण है इतने भयंकर संकट में सरकार ने ब्राह्मण समुदाय का बोर्ड बनाया और उसमें छोटे से हिमाचल में 300 सदस्यों को नामित किया। ऐसे भयंकर आर्थिक संकट के समय इस प्रकार का अनावश्यक बोर्ड बनाना एक बहुत बड़ी राजनीतिक मूर्खता है।
उन्होंने कहा कि जब मुझे प्रदेश की सरकार को चलाने की जिम्मेदारी मिली थी तो सरकार को सरलता से फिजूलखर्ची से बचाने की कोशिश की थी। गंगा सिंह की अध्यक्षता में एक बचत कमेटी बनाई थी। उन्होंने गहरा अध्ययन किया और उनके सुझावों के अनुसार हमने बहुत ज्यादा बचत की। सरकारी अधिकारी घूमने के लिए शनिवार को कार्यक्रम बनाते थे और परिवार सहित रविवार को मौज-मस्ती होती थी।
मैंने आदेश दिया कि सरकार की हर गाड़ी शुक्रवार सायं अपने केन्द्र पर आ जाएगी और शनिवार, रविवार और सोमवार को बिना अनुमति के कोई सरकारी गाड़ी सड़क पर नजर नहीं आएगी। पहली बार 50 करोड़ रुपए की बचत में 30 करोड़ रुपए केवल गाड़ियों से हुई थी। हमने इतनी बारीकी से सोचा। शांता कुमार ने कहा कि सरकार की आय बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाए। भारत सरकार से इतिहास में पहली बार पन बिजली परियोजनाओं में राॅयल्टी का सिद्धान्त मनवाया। शांता कुमार ने कहा कि सरकार कठोरता से बचत करने का निर्णय करे। नए साधन बनाने की कोशिश करे।