हिमाचल की पंचायतों में आज खत्म हुआ प्रधानों का कार्यकाल, 1 फरवरी से बीडीओ और पंचायत सचिव संभालेंगे कमान

Edited By Vijay, Updated: 31 Jan, 2026 06:00 PM

charge given of panchayat to bdo and panchayat secretary

हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों में आज चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल आधिकारिक तौर पर समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही प्रदेश भर के गांवों में विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को सरकार ने दूर कर दिया है।

शिमला (संताेष): हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों में आज चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल आधिकारिक तौर पर समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही प्रदेश भर के गांवों में विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को सरकार ने दूर कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 फरवरी से पंचायतों में कामकाज नहीं रुकेगा, बल्कि इसके लिए एक नई वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिसकी अधिसूचना पंचायती राज विभाग की तरफ से जारी कर दी गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार, 31 जनवरी, 2026 को कार्यकाल पूरा होते ही वर्तमान में चुनी हुई सभी पंचायती राज संस्थाएं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) भंग  मानी जाएंगी। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 120 और 128 के तहत यह कार्यवाही की गई है। बता दें कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 लागू होने के कारण समय पर चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया है, इसलिए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था की है।

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इन अधिकारियों को सौंपी प्रधान की शक्तियां
सरकार द्वारा जारी नए आदेशों के मुताबिक 1 फरवरी से पंचायत प्रधानों की सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां अब सरकारी अधिकारियों के पास होंगी। व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार ने खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) और पंचायत सचिवों को ये अधिकार सौंप दिए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि अब चैक पर हस्ताक्षर करने से लेकर विकास कार्यों की मंजूरी तक का जिम्मा इन्हीं अधिकारियों के पास होगा।

इन अधिकारियों के हाथ पंचायत समिति की कमान
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पंचायत समिति के स्तर पर कामकाज के संचालन के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। इस नई व्यवस्था में पंचायत समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को कमेटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। वहीं, सोशल एजुकेशन और ब्लॉक प्लानिंग ऑफिसर (SEBPO) इस कमेटी के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए पंचायत इंस्पैक्टर (या सब-इंस्पेक्टर) को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि SEBPO या इंस्पैक्टर का पद खाली है, तो खंड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा नामित अन्य अधिकारी यह जिम्मेदारी निभाएंगे।

जिला परिषद का दायित्व इन अधिकारियों पर
इसी तर्ज पर सबसे ऊपरी स्तर यानी जिला परिषद के कामकाज के लिए भी तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जिला परिषद की शक्तियों का प्रयोग करने और कार्यभार संभालने के लिए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है। इनके सहयोग के लिए जिला विकास अधिकारी (District Development Officer) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा, जिला पंचायत अधिकारी (District Panchayat Officer) इस कमेटी में सदस्य सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये तीनों अधिकारी मिलकर जिला परिषद के सभी कार्यों और शक्तियों का निष्पादन करेंगे।

 

जनता की दुविधा हुई खत्म
पिछले कुछ समय से आम जनता इस बात को लेकर काफी पशोपेश में थी कि प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनके जरूरी काम कैसे होंगे। लोगों को डर था कि परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र या मनरेगा के कार्यों में बाधा आ सकती है। सरकार के इस फैसले से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि वे सीधे पंचायत सचिव या संबंधित अधिकारियों के माध्यम से अपना काम करवा सकेंगे।

चुनाव होने तक लागू रहेगी व्यवस्था
गौरतलब है कि पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल आज पूरा हो गया है, लेकिन अभी नई पंचायतों के गठन के लिए चुनाव नहीं हुए हैं। विकास कार्यों पर ब्रेक न लगे, इसी उद्देश्य से पंचायती राज विभाग ने यह कदम उठाया है। जब तक नए चुनाव संपन्न नहीं हो जाते और नए जनप्रतिनिधि नहीं चुन लिए जाते, तब तक पंचायतों की बागडोर पूरी तरह से बीडीओ और पंचायत सचिवों के हाथ में ही रहेगी।

इन क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा आदेश
यह आदेश पूरे प्रदेश में लागू होगा, लेकिन जनजातीय क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है। इसमें लाहौल-स्पीति जिले के केलांग उपमंडल और काजा, चम्बा जिले का पांगी उपमंडल और कुल्लू जिले की 4 विशिष्ट ग्राम पंचायतें शामिल नहीं हैं। वहां मौजूदा व्यवस्था जारी रह सकती है या अलग नियम लागू होंगे।

अधिकारियों को निर्देश जारी
पंचायती राज सचिव ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, बीडीओ और जिला पंचायत अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि 31 जनवरी के बाद इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

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