Edited By Vijay, Updated: 13 Mar, 2026 12:15 PM

हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों और उनकी जांच को लेकर अब पूरी तरह से गोपनीयता बरती जाएगी। राज्य की सुक्खू सरकार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act, 2005) के...
शिमला: हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों और उनकी जांच को लेकर अब पूरी तरह से गोपनीयता बरती जाएगी। राज्य की सुक्खू सरकार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act, 2005) के दायरे से बाहर कर दिया है। राज्य सरकार के कार्मिक विभाग (प्रशासनिक सुधार) द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद अब प्रदेश का कोई भी नागरिक, आरटीआई कार्यकर्ता या पत्रकार विजिलैंस विभाग से भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच, रेड या अधिकारियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की जानकारी आरटीआई के जरिए नहीं मांग सकेगा।
अधिसूचना जारी, सभी विभागों को भेजे गए निर्देश
मुख्य सचिव की तरफ से जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 की उपधारा (4) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को आरटीआई अधिनियम के दायरे से बाहर करने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान की है। इस अधिसूचना की प्रतियां राज्यपाल के सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, सभी प्रशासनिक सचिवों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और राज्य के सभी बोर्डों व निगमों के प्रबंध निदेशकों को भेज दी गई हैं, साथ ही इसे आधिकारिक ई-गजट में प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार ने इस अधिनियम का किया इस्तेमाल
आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 24(4) राज्य सरकारों को यह अधिकार देती है कि वे सुरक्षा और खुफिया एजैंसियों को इस कानून के दायरे से छूट दे सकती हैं। हिमाचल सरकार ने भी इसी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए विजिलैंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर किया है। हालांकि, इस कानून में यह भी स्पष्ट प्रावधान है कि भ्रष्टाचार के आरोपों और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी जानकारी को इस धारा के तहत भी नहीं रोका जा सकता। ऐसे में सीधे तौर पर एक एंटी करप्शन ब्यूरो (जिसका मुख्य काम ही भ्रष्टाचार रोकना है) को ही आरटीआई से पूरी तरह बाहर कर देना, आने वाले दिनों में बड़े विवाद का कारण बन सकता है। आरटीआई कार्यकर्ता इसे पारदर्शिता के खिलाफ उठाया गया कदम बता सकते हैं।
नहीं मिलेगी लंबित शिकायतों और जांच की जानकारी
अब तक लोग आरटीआई लगाकर यह जान लेते थे कि किस विभाग के किस अधिकारी के खिलाफ विजिलैंस में कितनी शिकायतें लंबित हैं या जांच कहां तक पहुंची है। अब यह जानकारी नहीं मिलेगी। विजिलैंस द्वारा की गई गिरफ्तारियों, चार्जशीट दाखिल करने में हो रही देरी या बंद की गई फाइलों का ब्यौरा अब सार्वजनिक नहीं हो सकेगा। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा करने वाली सरकार के इस कदम से विपक्ष को हमलावर होने का बड़ा मौका मिल गया है। वहीं सरकार का तर्क है कि संवेदनशील जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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