Edited By Jyoti M, Updated: 24 Feb, 2026 11:30 AM

हिमाचल के ऐतिहासिक और रहस्यों से भरे मलाणा गांव में सोमवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक रिहायशी मकान से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। मणिकर्ण घाटी के इस दुर्गम क्षेत्र में जब तक सरकारी तंत्र हरकत में आता, स्थानीय जांबाजों ने खुद ही मोर्चा...
कुल्लू। हिमाचल के ऐतिहासिक और रहस्यों से भरे मलाणा गांव में सोमवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक रिहायशी मकान से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। मणिकर्ण घाटी के इस दुर्गम क्षेत्र में जब तक सरकारी तंत्र हरकत में आता, स्थानीय जांबाजों ने खुद ही मोर्चा संभालकर एक बड़ी त्रासदी को टलने पर मजबूर कर दिया।
जब संकट में दिखी 'अपनों' की ताकत
घटना सोमवार सूर्यास्त के बाद की है। ग्रामीण खीमीराम के तीन मंजिला पुश्तैनी घर की ऊपरी मंजिल से अचानक गाढ़ा धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया। पहाड़ी रास्तों की संकीर्णता और अग्निशमन दल की पहुंच से दूर होने के बावजूद, गांव वालों ने हार नहीं मानी।
दर्जनों हाथ एक साथ पानी और मिट्टी लेकर लपटों से भिड़ गए। ग्रामीणों की इस त्वरित प्रतिक्रिया का ही नतीजा था कि आग को पूरी बस्ती में फैलने से पहले ही बुझा दिया गया, वरना लकड़ी के बने इन मकानों के बीच पूरा गांव खाक हो सकता था।

तबाही का मंजर और प्रशासनिक कार्रवाई
इस आकस्मिक घटना ने परिवार को गहरे जख्म दिए हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार घर का ढांचा और अंदर रखा कीमती सामान जलने से करीब 8 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ है। फिलहाल आग लगने की असली वजह साफ नहीं हो पाई है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।
प्रशासन का आश्वासन
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवार को ढांढस बंधाया है और जल्द ही नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मलाणा के इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में सामूहिक एकता ही सबसे बड़ा रक्षा कवच है।