अग्निवीरों के लिए खुलेंगे भर्ती के द्वार: अमित शाह का राज्यों के CM को संदेश, रिजर्व करें 20% नौकरियां

Edited By Jyoti M, Updated: 25 Mar, 2026 12:06 PM

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देश सेवा का जज्बा रखने वाले युवाओं के लिए 'अग्निवीर' योजना अब महज चार साल का अनुबंध नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षित राह बनती दिख रही है। साल 2027 में जब अग्निवीरों की पहली टोली अपनी सेवा पूरी कर नागरिक जीवन में लौटेगी, तो केंद्र सरकार चाहती है कि...

हिमाचल डेस्क। देश सेवा का जज्बा रखने वाले युवाओं के लिए 'अग्निवीर' योजना अब महज चार साल का अनुबंध नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षित राह बनती दिख रही है। साल 2027 में जब अग्निवीरों की पहली टोली अपनी सेवा पूरी कर नागरिक जीवन में लौटेगी, तो केंद्र सरकार चाहती है कि उनके पास रोजगार के ठोस विकल्प मौजूद हों। इसी विजन को अमलीजामा पहनाने के लिए अब राज्य सरकारों के पाले में गेंद डाल दी गई है।

राज्यों को दिल्ली का संदेश: 20% का कोटा तय करें

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए देश के सभी मुख्यमंत्रियों को सीधा पत्र लिखा है। गृह मंत्री अमित शाह के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में राज्यों से सिफारिश की गई है कि वे अपनी सरकारी भर्तियों में अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करें। सरकार का मानना है कि सेना के कड़े अनुशासन और ट्रेनिंग से तपकर निकले ये युवा राज्यों की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था के लिए अनमोल संपत्ति साबित होंगे।

इन क्षेत्रों में खुलेंगे अवसर के द्वार

केंद्र ने विशेष रूप से उन विभागों को चिन्हित किया है जहाँ शारीरिक दक्षता और अनुशासन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। सिफारिश के अनुसार निम्नलिखित पदों पर वरीयता मिल सकती है। 

पुलिस बल: कांस्टेबल, जेल वार्डन और घुड़सवार पुलिस।

सुरक्षा एवं आपदा: SDRF, फायरमैन और विशेष पुलिस अधिकारी (SPO)।

पर्यावरण एवं संसाधन: वन विभाग के गार्ड और माइनिंग गार्ड।

रेस में आगे निकले हरियाणा और उत्तराखंड

अग्निवीरों को सेटल करने की इस कवायद में हरियाणा ने बाजी मार ली है। वह वर्दीधारी सेवाओं और ग्रुप-सी की भर्तियों में आरक्षण लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने भी 'वीरभूमि' की परंपरा को निभाते हुए अपनी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए कोटा घोषित कर दिया है।

देवभूमि हिमाचल प्रदेश, जहाँ का लगभग हर घर सेना से जुड़ा है, वहाँ भी हलचल तेज हो गई है। राज्य के सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) मदनशील शर्मा ने पुष्टि की है कि गृह मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना प्रदेश सरकार को सौंप दी गई है। अब अंतिम फैसला सुक्खू सरकार के स्तर पर होना है कि वह इन युवाओं को राज्य की मुख्यधारा में कैसे शामिल करती है।

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