मवेशियों के साथ रहने को मजबूर यह परिवार, BPL में शामिल होने के बावजूद नहीं मिला लाभ

Edited By kirti, Updated: 22 Jul, 2019 10:07 AM

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बेघर लोगों व कच्चे तथा खस्ता हालत वाले एक कमरे के मकान में गुजर-बसर करने वाले परिवारों को घर मुहैया करवाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने आवास योजनाएं चला रखी हैं। इन योजनाओं का प्रदेश के अब तक लाखों लोग लाभ ले चुके हैं, लेकिन चुराह विधानसभा क्षेत्र...

चम्बा (विनोद): बेघर लोगों व कच्चे तथा खस्ता हालत वाले एक कमरे के मकान में गुजर-बसर करने वाले परिवारों को घर मुहैया करवाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने आवास योजनाएं चला रखी हैं। इन योजनाओं का प्रदेश के अब तक लाखों लोग लाभ ले चुके हैं, लेकिन चुराह विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाली ग्राम पंचायत चांजू के गांव गुडुआ के भूरी सिंह पुत्र मुसद्दी के लिए यह सरकारी आवास योजनाएं कोई मायने नहीं रखती हैं। इसकी वजह यह है कि बी.पी.एल. सूची में शामिल होने के बावजूद इस 6 सदस्यों वाले परिवार को बार-बार आवेदन करने के बावजूद आवास सुविधा का लाभ नहीं मिला है।

इस परिवार की गुरबत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भूरी सिंह जोकि मजदूरी करता है, लेकिन माह में चंद रोज ही उसे काम मिलता है। ऐसे में परिवार के पालन-पोषण में उसकी पत्नी बसंती बजरी तोड़ कर हाथ बंटाती है। शुक्र है कि चांजू में कुछ आर्थिक रूप से संपन्न लोग पक्के मकान बनाने का काम चलाए हुए हैं, जिसके चलते बसंती को बजरी तोडऩे का काम मिल गया है, वरना इस परिवार पर भूखों मरने की नौबत आन पड़ती। भूरी सिंह के मकान की बात करें तो इसका मकान लगभग गिरने की कगार पर है तो वहीं छत के नाम पर मिट्टी की छत मौजूद है, जोकि बरसात के दिनों में टपकनी शुरू हो जाती है।

एक बड़े कमरे वाले इस मकान के एक कोने में मवेशी बंधे रहते हैं, जोकि वहीं पर मल-मूत्र करते हैं तो दूसरे कोने पर पूरा परिवार एक साथ बैठ कर खाना खाता है। इस कमरे के एक कोने पर खाना बनाने का काम किया जाता है तो एक कोने में पूरा परिवार सोता है। यानी इस परिवार के लिए यही एक कमरा पूरी दुनिया है। यह परिवार इस कदर गरीब है कि अपने मवेशियों को अलग रखने के लिए यह गऊशाला तक नहीं बना पाया है। यह स्थिति जहां उनकी कमजोर माली हालत को दर्शाती है तो साथ ही यह उस व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है जोकि आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों को आवास योजना से लाभान्वित करवाती है।

राजनीतिक पहुंच गरीबों के लिए चलाई योजना पर भारी

जानकारी अनुसार इस पंचायत में कई ऐसे परिवार हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है, लेकिन वे आॢथक रूप से संपन्न हैं। यही नहीं, कुछ तो ऐसे परिवार भी हैं, जिन्होंने दोनों आवास योजनाओं का लाभ लिया है। यानी राजनीतिक पहुंच यहां पर गरीबों के लिए चलाई गई योजना पर भारी पड़ती नजर आती है। भूरी सिंह व उसकी पत्नी बसंती की मानें तो वे लगातार बीते 4 वर्षों से इस आवास योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए ग्राम सभा व पंचायत की बैठक में गुहार लगाते रहते हैं, लेकिन अभी तक उन्हें किसी भी योजना के तहत यह लाभ नहीं दिया गया है। मकान की क्षतिग्रस्त स्थिति की वजह से हर दिन मन में यह डर बना रहता है कि न जाने कब उनके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़े।

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