Edited By Vijay, Updated: 22 Mar, 2026 04:21 PM

हिमाचल प्रदेश में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच राज्य पुलिस ने अपने ही विभाग की काली भेड़ों बड़ी और सख्त कार्रवाई की है।
शिमला/कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच राज्य पुलिस ने अपने ही विभाग की काली भेड़ों बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। कुल्लू की स्पैशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में तैनात 4 पुलिस कर्मियों को एलएसडी ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक मामले में संलिप्त पाए जाने पर सेवा से तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय का स्पष्ट कहना है कि यह ऐतिहासिक कार्रवाई राज्य में नशे के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरैंस नीति का हिस्सा है।
इन 4 पुलिस कर्मियों पर गिरी गाज
ड्रग्स माफिया की मदद करने के आरोप में जिन पुलिस कर्मियों को नौकरी से निकाला गया है, उनमें हैड कांस्टेबल राजेश कुमार, हैड कांस्टेबल समीर कुमार, कांस्टेबल नितेश और कांस्टेबल अशोक कुमार शामिल हैं। विभागीय और विस्तृत जांच में दोष सिद्ध होने के बाद इन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) और पुलिस अधिनियम के सख्त प्रावधानों के तहत सेवा से हमेशा के लिए हटा दिया गया है।
शिमला में पकड़ी 562 LSD स्ट्रिप्स से जुड़ा है कनैक्शन
यह पूरा मामला न्यू शिमला पुलिस थाना क्षेत्र में पकड़ी गई ड्रग्स की एक बड़ी खेप से जुड़ा है। पुलिस ने 10 मार्च, 2026 को एक अहम कार्रवाई करते हुए पंजाब के मोगा निवासी संदीप शर्मा और सिरमौर की रहने वाली प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से 562 एलएसडी (LSD) स्ट्रिप्स बरामद हुई थीं, जिनका वजन करीब 11.570 ग्राम था। जब पुलिस ने इन दोनों से सख्ती से पूछताछ की, तो इस इंटरनेशनल ड्रग्स के सप्लायर का नाम सामने आया। पता चला कि यह खेप केरल के रहने वाले नविएल हैरिसन ने सप्लाई की थी। इसके बाद पुलिस टीम ने जाल बिछाकर 13 मार्च, 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम से नविएल हैरिसन को भी धर दबोचा। इसी गिरफ्तारी के बाद तस्करी के इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ और पुलिस कर्मियों की भूमिका सामने आई।
तस्करों को पकड़ने की बजाय की उनकी मदद
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि एलएसडी की यह खेप कुल्लू जिले में लाई गई थी। उस दौरान एसटीएफ कुल्लू में तैनात इन चारों पुलिस कर्मियों को इसकी भनक थी, लेकिन अपने कर्तव्य का निर्वहन करने और तस्करी को रोकने की बजाय, इन्होंने आरोपियों के साथ साठगांठ कर ली और नशे की खेप को आगे बढ़ाने में उनकी मदद की। डिजिटल, तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर इन पुलिस कर्मियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध पाई गई। अधिकारियों के अनुसार यह गंभीर अनुशासनहीनता, आपराधिक साजिश और नैतिक कदाचार का मामला था।
16 मार्च को हुए सस्पैंड, 19 मार्च को हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस मुख्यालय ने त्वरित एक्शन लेते हुए सबसे पहले 16 मार्च, 2026 को इन चारों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद 19 मार्च को शिमला पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अब मामले की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद इन पर बर्खास्तगी की अंतिम कार्रवाई की गई है। पुलिस प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि वर्दी की आड़ में ड्रग्स माफिया का साथ देने वालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब तक 21 पुलिस कर्मी हो चुके हैं बर्खास्त
हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी में संलिप्त ऐसे पुलिस कर्मियों पर यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इस ताजा कार्रवाई से पहले भी ड्रग्स से जुड़े मामलों में 17 दागदार पुलिस कर्मियों को सेवा से हटाया जा चुका है। अब इन 4 नए मामलों के साथ बर्खास्त किए गए पुलिस कर्मियों की कुल संख्या बढ़कर 21 हो गई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
नशे के खिलाफ जारी है अभियान
गौरतलब है कि राज्य सरकार और पुलिस ने 15 नवम्बर, 2025 से चिट्टा मुक्त हिमाचल नाम से एक व्यापक अभियान शुरू किया था। पुलिस इसे जनभागीदारी के साथ एक जनांदोलन का रूप देने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने प्रदेश की जनता, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे नशे के कारोबार या इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति (चाहे वह पुलिस कर्मी ही क्यों न हो) की जानकारी तुरंत टोल-फ्री नंबर 112 या नजदीकी पुलिस थाने में दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।
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