Edited By Jyoti M, Updated: 16 Mar, 2026 01:25 PM

आज के दौर में स्मार्टफोन सिर्फ संचार का साधन नहीं, बल्कि बच्चों के लिए एक ऐसी जिद बन गया है जो कभी-कभी जानलेवा साबित होती है। बिलासपुर से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ मुरादाबाद के एक परिवार ने अपने 13 साल के चिराग को सिर्फ...
हिमाचल डेस्क। आज के दौर में स्मार्टफोन सिर्फ संचार का साधन नहीं, बल्कि बच्चों के लिए एक ऐसी जिद बन गया है जो कभी-कभी जानलेवा साबित होती है। बिलासपुर से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ मुरादाबाद के एक परिवार ने अपने 13 साल के चिराग को सिर्फ इसलिए खो दिया क्योंकि माँ ने परीक्षा के समय मोबाइल देने से मना कर दिया था।
जिद, नाराजगी और फिर खामोशी
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले (तहसील बिलारी) का रहने वाला सचिन अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर गंभीर होने की उम्र में था। वर्तमान में उसकी परीक्षाएं चल रही थीं। जब उसने अपनी माँ से फोन चलाने की मांग की, तो एक जिम्मेदार अभिभावक की तरह माँ ने उसकी पढ़ाई का हवाला देकर इनकार कर दिया। किसी ने नहीं सोचा था कि अपनी भलाई के लिए सुनी गई यह 'ना' सचिन को इस कदर आहत कर देगी।
कमरे के भीतर का वो खौफनाक मंजर
माँ की फटकार से नाराज होकर किशोर चुपचाप अपने कमरे में चला गया। परिजनों को लगा कि वह शायद पढ़ाई करने या सोने गया है। लेकिन कमरे के भीतर उसने माँ की ही साड़ी का फंदा बनाया और अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। काफी देर तक हलचल न होने पर जब माता-पिता ने कमरे का दरवाजा खोला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सचिन पंखे के कुंडे से लटका हुआ था।
अस्पताल पहुँचने से पहले ही बुझ गया जीवन का दीपक
बेसुध परिजन उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल बिलासपुर ले गए, जहाँ उम्मीद थी कि शायद कोई चमत्कार हो जाए। परंतु डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से मिली सूचना के आधार पर सदर थाना पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
प्रारंभिक जांच और परिजनों के बयानों से स्पष्ट है कि यह आत्महत्या मोबाइल न मिलने के कारण उपजे गुस्से का परिणाम है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया है।