Edited By Updated: 20 Sep, 2016 09:46 PM

नशा तस्कर नशे का सामान कैसे बेचते हैं इसकी बानगी पांवटा में देखने को मिल रही है, जहां पर तस्कर युवाओं को बादाम के नाम से नशीले कैप्सूल बेच रहे हैं।
पांवटा साहिब: नशा तस्कर नशे का सामान कैसे बेचते हैं इसकी बानगी पांवटा में देखने को मिल रही है, जहां पर तस्कर युवाओं को बादाम के नाम से नशीले कैप्सूल बेच रहे हैं। दरअसल जिन दवाई विक्रेताओं व झोलाछाप डाक्टरों के पास ये कैप्सूल मिलते हैं, युवा प्रत्यक्ष तौर पर इसका नाम लेने में हिचकिचाते हैं जिसके बाद इनका निक नेम बादाम रखा गया है। असली बादाम तो 1-2 रुपए में मिल जाता है जबकि नशा पोषित यह बादाम 30 से 50 रुपए के हिसाब से बिक रहा है। नाम न छापने की शर्त पर नशे के आदी एक युवा ने बताया कि दुकानों से कैप्सूल को बादाम के नाम से खरीदा जाता है ताकि आम आदमी यह भाषा न समझ सके। यह बादाम यानी नशीला कैप्सूल 30 से 50 रुपए तक मिल रहा है।
शाम ढलते ही मंडराते हैं दुकानों के पास
दरअसल बीते दिनों चला भांग उखाड़ो अभियान से ग्रामीण स्तर पर आसानी से मिलने वाला नशा अब समाप्त हो गया है, जिसके बाद युवा नशीले कैप्सूलों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। आए दिन शाम के समय नशे के आदी इन युवाओं को ऐसी दुकानों के आसपास मंडराते देखा जा सकता है, जहां पर नशे के ये कैप्सूल बिकते हैं। यह नशा युवाओं को बर्बाद कर रहा है।
भांग तो उखड़ गई नशा तस्करों को कौन भगाए
लोगों का कहना है कि भांग तो उखड़ गई लेकिन गांव में बैठे नशा तस्करों को कौन भगाए। ये तस्कर पहले के मुकाबले 3 गुना ज्यादा पैसे वसूल कर मालामाल होते जा रहे हंै जबकि युवा नशे के आदी बनते जा रहे हैं। गांव तक यह नशा कैसे पहुंच रहा है, इसका पता लगाने की कोशिश कम ही की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि भंाग उखाड़ो की तरह कैप्सूल बेचने वालों को पकडऩे की भी जरूरत है, तभी नशे को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है
जिला पुलिस अधीक्षक सिरमौर सौम्या साम्बाशिवन पुलिस सभी प्रकार के नशे को समाप्त करने के लिए अभियान चला रही है। ग्रामीणों को पुलिस की मदद करनी चाहिए। अगर कोई युवाओं को नशा बेच रहा है तो पुलिस को सूचित करे, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।