Edited By Jyoti M, Updated: 19 Mar, 2026 05:19 PM

हिमाचल की घुमावदार सड़कें कभी-कभी अनुभव की अग्निपरीक्षा लेती हैं। वीरवार की सुबह शामती बाईपास पर कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जब गेहूं की बोरियों से लदा एक विशालकाय ट्रक (ट्राला) मौत की खाई के मुहाने पर जाकर रुक गया।
सोलन। हिमाचल की घुमावदार सड़कें कभी-कभी अनुभव की अग्निपरीक्षा लेती हैं। वीरवार की सुबह शामती बाईपास पर कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जब गेहूं की बोरियों से लदा एक विशालकाय ट्रक (ट्राला) मौत की खाई के मुहाने पर जाकर रुक गया। यह महज एक हादसा टलना नहीं था, बल्कि एक कुशल चालक की तत्परता और किस्मत का वो मेल था, जिसने एक बड़े विनाश को शून्य पर लाकर खड़ा कर दिया।
क्या थी पूरी घटना?
हरियाणा के पानीपत से सरकारी राशन (गेहूं) लेकर चला यह भारी वाहन ओच्छघाट स्थित एफसीआई डिपो की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही ट्रक आंजी के समीप बने एक संकीर्ण और खतरनाक मोड़ पर पहुँचा, भारी वजन के कारण वाहन का संतुलन बिगड़ने लगा।
एक पल के लिए ऐसा लगा कि ट्रक सीधे नीचे खेतों में जा गिरेगा, लेकिन चालक ने अपने अनुभव का परिचय देते हुए ऐन वक्त पर ब्रेक और स्टीयरिंग का ऐसा तालमेल बिठाया कि ट्रक खाई के किनारे पर ही ठिठक गया।
आंजी के पास मौजूद तीखे मोड़ भारी वाहनों के लिए 'ब्लैक स्पॉट' साबित हो रहे हैं। तकनीकी रूप से इन मोड़ों पर बड़े वाहनों को मोड़ने के लिए पर्याप्त जगह का अभाव है। मोड़ पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न होना भी जोखिम को बढ़ाता है।
स्थानीय निवासियों की बढ़ती चिंता
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब यहाँ सांसें थामने वाला दृश्य दिखा हो। क्षेत्रीय निवासियों ने प्रशासन को आगाह करते हुए मांग की है कि इन "मौत के मोड़ों" का सुधारीकरण किया जाए। यदि समय रहते यहाँ क्रैश बैरियर या सड़कों को चौड़ा करने का काम नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़े जान-माल के नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, राहत की बात यह है कि इस पूरी घटना में न तो माल का नुकसान हुआ और न ही कोई व्यक्ति हताहत हुआ। चालक की सतर्कता की हर कोई सराहना कर रहा है।