Edited By Kuldeep, Updated: 08 Jan, 2026 04:22 PM

जिला ऊना के जंगलों में फिर से तेंदुए दिखाई दिए हैं। भले ही इनको लेकर लोगों में भय हो लेकिन परफैक्ट ईको सिस्टम के लिए यह प्रसन्नता विषय है।
ऊना (सुरेन्द्र शर्मा): जिला ऊना के जंगलों में फिर से तेंदुए दिखाई दिए हैं। भले ही इनको लेकर लोगों में भय हो लेकिन परफैक्ट ईको सिस्टम के लिए यह प्रसन्नता विषय है। अब हरोली क्षेत्र के कांटे गांव में एक साथ तेंदुए का परिवार दिखाई दिया है। 4 तेंदुओं पर आधारित यह परिवार तब दिखाई दिया, जब कुछ युवा कांटे के ऊपरी क्षेत्र मेें स्थित धार्मिक डेरे की तरफ जा रहे थे।
देखते-देखते ही पहले एक तेंदुआ फिर उसके साथ 3 और शावक भी दिखाई दिए। ये बड़े आराम से सड़क पर खेल रहे थे। गाड़ी को देखने के कुछ देर बाद ये झाड़ियों की तरफ चले गए। इस दौरान युवाओं ने इसकी वीडियो बना ली। हालांकि लोग भयभीत भी हैं और वन क्षेत्र में जाने से सहम रहे हैं। हरोली क्षेत्र में ही यह तीसरा मामला है, जब तेंदुओं की मौजूदगी पाई गई है। कुछ दिन पहले ही हरोली क्षेेत्र में एक तेंदुआ सड़क पर चलता हुआ दिखाई दिया था। इसका भी वाहन चालकों ने वीडियो बनाया।
वह झाड़ियों में चला गया लेकिन वहां से खड़ा होकर काफी देर तक वाहन को देखता रहा। इससे पहले हरोली के ही पालकवाह में एक तेंदुआ रिहायशी क्षेत्र में पहुंचा और उसकी झड़प लोगों के साथ हुई। इसमें कुछ लोग घायल भी हुए थे। हालांकि वन विभाग की टीम ने ट्रैंकुलाइजर गन के साथ तेंदुए को बेहोश कर उसे जू में भेज दिया था। इसी प्रकार कुटलैहड़ के डंगेहड़ा-कुरियाला क्षेत्र में हाल ही में एक तेंदुआ एक रिहायशी क्षेत्र में पहुंचा। वह पेड़ पर बैठ गया और जब तक वन विभाग की टीम रैस्क्यू के लिए पहुंची, तब वह गायब हो गया।
सर्वे में पाई गई है 30 से 35 तेंदुओं की मौजूदगी
जिला ऊना में हाल ही में हुए एक सर्वे में 30 से 35 तेंदुओं की मौजूदगी पाई गई है। कोलकाता स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण संस्था, जोकि अन्वेषण और अनुसंधान पर कार्य करती है, ने जो सर्वे किया था। उसके मुताबिक जिले के प्रति 2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 2 तेंदुओं की मौजूदगी का पता लगाया था। पूरे क्षेत्र के हिसाब से यह 35 से अधिक तेंदुए पाए गए थे और इसकी सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
ईको सिस्टम के लिए है बेहतर
तेंदुओं की बढ़ती संख्या इसलिए भी सुखद है, क्योंकि इससे ईको सिस्टम बेहतर होता है और जो जीव फसलों को नष्ट करते हैं, उनकी बढ़ती हुई संख्या को कम करने के लिए यह तेंदुए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, क्योंकि यह उनके लिए एक फूड चैन का हिस्सा हैं। वनों में कम होती शिकार की घटनाओं का भी यह परिणाम है कि तेंदुए लगातार बढ़ रहे हैं। प्राकृतिक सिस्टम को बेहतर बनाने की दशा में यह अच्छा संकेत है। हालांकि बढ़ती हुई तेंदुओं की आबादी से लोगों को खतरा भी बना रहता है। हाल ही में कई ऐसी घटनाएं भी हुई हैं, जब तेंदुए आबादियों तक पहुंचे और उनकी लोगों के साथ झड़प हुई।
वन्य प्राणियों के संरक्षण का है उदाहरण
वन विभाग के अधिकारी सुशील ठाकुर ने माना कि हरोली के कांटे में जो तेंदुए दिखाई दिए हैं, वे एक परिवार हैं और मादा तेंदुए के साथ उसके शावक हैं। ईको सिस्टम के लिए यह प्रसन्नता का विषय है। जिला ऊना में जहां एक तरफ तेंदुए पाए जा रहे हैं, वहीं वन्य प्राणियों की संरक्षित प्रजातियां भी दिखाई दे रही हैं। वन्य प्राणियों के संरक्षण का यह बढ़ा उदाहरण है। डीएफओ के मुताबिक जिले की स्वां नदी और गोबिंदसागर झील में विदेशी परिंदे बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। ये मेहमान हैं और कई सौ किलोमीटर का सफर तय कर यह पक्षी यहां पहुंचते हैं। इन्हें बर्ड वाटर भी कहा जाता है, क्योंकि ये पानी युक्त क्षेत्रों में ही पहुंचते हैं।