Edited By Jyoti M, Updated: 11 Mar, 2026 01:14 PM

हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर अब विकास की रफ्तार और तेज होने वाली है। लंबे समय से राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन रहा नेशनल हाईवे 503 अब एक नए अवतार में नजर आएगा। केंद्र सरकार ने इस मार्ग को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपने...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर अब विकास की रफ्तार और तेज होने वाली है। लंबे समय से राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन रहा नेशनल हाईवे 503 अब एक नए अवतार में नजर आएगा। केंद्र सरकार ने इस मार्ग को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपने की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जिससे इसके फोरलेन बनने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
प्रोजेक्ट का नया स्वरूप और विस्तार
अभी तक इस हाईवे की देखरेख राज्य का एनएच विंग कर रहा था, लेकिन एनएचएआई के हाथों में कमान आने के बाद अब इसके आधुनिकिकरण में तेजी आएगी। इस हाईवे को मुख्य रूप से दो खंडों में विभाजित किया गया है। पहला हिस्सा ऊना से रानीताल (वाया अंब-मुबारकपुर) तक है, जिसकी लंबाई लगभग 99 किलोमीटर है। दूसरा हिस्सा मटौर से मैक्लोडगंज (वाया धर्मशाला) तक फैला है, जो करीब 22 किलोमीटर लंबा है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2009 तक यह मार्ग महज एक स्टेट हाईवे (SH-22) था, जिसे बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा मिला और अब यह फोरलेन की श्रेणी में शामिल होने जा रहा है।
कम होगी दूरी, बचेगा समय
प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका नया अलाइनमेंट (सर्वे) होगा। प्राधिकरण की कोशिश है कि मौजूदा रूट (भरवाईं, ढलियारा, देहरा) में ऐसे सुधार किए जाएं जिससे गंतव्य तक पहुंचने की दूरी कम हो सके।
एनएच विंग द्वारा पहले किए गए सर्वे के आधार पर अब पीएमसी (Project Management Consultancy) विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। नया रूट तय करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि कम से कम निजी भूमि का अधिग्रहण करना पड़े, ताकि मुआवजे का बोझ कम हो और प्रोजेक्ट किफायती रहे। फोरलेन बनाते समय कोशिश यह रहेगी कि मौजूदा सड़क का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए ताकि पर्यावरण और बजट दोनों का संतुलन बना रहे।
देहरा में ब्यास नदी पर बनेगा नया विकल्प?
इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा देहरा में ब्यास नदी पर बना दशकों पुराना पुल है। 1962 में निर्मित इस पुल की चौड़ाई अब बढ़ते ट्रैफिक के लिए नाकाफी साबित हो रही है। फोरलेन की जरूरतों को देखते हुए पुराने पुल के समानांतर एक नया पुल बनाने की योजना है।
चर्चा है कि दोनों पुलों को जोड़कर एक चौड़ा मार्ग बनाया जाएगा, जिसमें बीच में डिवाइडर और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ की सुविधा होगी। नदी की कम चौड़ाई के कारण यहाँ निर्माण करना तकनीकी और आर्थिक रूप से आसान माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
एनएचएआई हमीरपुर के अधिकारियों के अनुसार, इसी महीने के अंत तक कागजी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। जमीन अधिग्रहण के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे। डीपीआर फाइनल होते ही धरातल पर काम शुरू हो जाएगा।