बचपन में छूटा स्कूल, YouTube से ट्रेनिंग लेकर इंडियन टीम में पहुंची हिमाचल की बेटी, अब जापान में फहराएगी तिरंगा

Edited By Vijay, Updated: 12 Mar, 2026 06:46 PM

tenzin dolma

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति की बर्फीली और दुर्गम वादियों से निकलकर एक बेटी ने इतिहास रच दिया है। दुनिया के सबसे ऊंचे गांवों में शुमार स्पीति के कोमिक गांव की रहने वाली अल्ट्रा मैराथन धाविका तेंजिन डोल्मा का चयन भारतीय टीम में हुआ है।

कुल्लू (संजीव): हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति की बर्फीली और दुर्गम वादियों से निकलकर एक बेटी ने इतिहास रच दिया है। दुनिया के सबसे ऊंचे गांवों में शुमार स्पीति के कोमिक गांव की रहने वाली अल्ट्रा मैराथन धाविका तेंजिन डोल्मा का चयन भारतीय टीम में हुआ है। अब वह 23 और 24 मई 2026 को जापान के हिरोसाकी में होने वाली प्रतिष्ठित आईएयू 24-घंटे एशियन ओशिनिया चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। एथलैटिक्स फैडरेशन ऑफ इंडिया  ने उनके नाम पर आधिकारिक मुहर लगा दी है।

24 घंटे लगातार दौड़ने की होगी चरम परीक्षा
जापान में होने वाली यह चैम्पियनशिप कोई आम दौड़ नहीं है। इसमें धावकों को बिना रुके निरंतर 24 घंटे तक दौड़ना होगा। यह किसी भी एथलीट के लिए शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। 15,000 फुट से अधिक की ऊंचाई वाले कोमिक गांव में पली-बढ़ी तेंजिन के लिए कम ऑक्सीजन में रहने और दौड़ने का अनुभव जापान की परिस्थितियों में उनके लिए एक बड़ा ब्रह्मास्त्र साबित हो सकता है।

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यूट्यूब से ली ट्रेनिंग, 30 की उम्र के बाद शुरू की दौड़
तेंजिन डोल्मा के संघर्ष और सफलता की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है। आर्थिक तंगी के कारण बचपन में ही स्कूल छोड़ने को मजबूर हुईं तेंजिन ने हार नहीं मानी। 25 साल की उम्र में उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। सुविधाओं के अभाव में उन्होंने मोबाइल पर यूट्यूब देखकर योग और फिटनैस की बारीकियां सीखीं। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण या कोच के उन्होंने 30 वर्ष की उम्र के बाद दौड़ना शुरू किया और 2017 में मनाली व लद्दाख की हाफ मैराथन जीतकर सबको चौंका दिया था।

बैंकॉक में जीत चुकी हैं सिल्वर मैडल
इससे पहले तेंजिन ने बैंकॉक (थाईलैंड) में आयोजित 100 किलोमीटर एशियन ओशिनिया चैम्पियनशिप में भारत के लिए रजत पदक  जीतकर अपना लोहा मनवाया था। उन्होंने 100 किलोमीटर की यह खतरनाक दूरी महज 9 घंटे 18 मिनट में पूरी कर ली थी।

आर्थिक तंगी भी नहीं डिगा पाई हौसला
तेंजिन की राह में सबसे बड़ी बाधा पैसा रहा है। एक स्व-वित्तपोषित एथलीट के रूप में उन्हें कई बार दौड़ने के लिए उचित जूते और ट्रेनिंग के लिए स्पॉन्सर्स की भारी कमी का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनके कदम नहीं रुके। तेंजिन का कहना है कि जब लक्ष्य पाने का जुनून सवार हो जाता है, तो इंसान अपने रास्ते खुद तलाश ही लेता है।

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सीएम सुक्खू और विधायक अनुराधा ने दी बधाई
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने तेंजिन डोल्मा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें और उनके परिवार को बधाई दी है। सीएम सुक्खू ने कहा कि संसाधनों के घोर अभाव और विषम परिस्थितियों के बावजूद तेंजिन का इस मुकाम तक पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने तेंजिन को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए जापान में भी देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद जताई है।

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