Kangra: टांडा अस्पताल में अव्यवस्था का आलम, मरीज काे स्ट्रेचर न मिलने पर फूटा महिला एम्बुलैंस चालक का गुस्सा, वीडियो वायरल

Edited By Vijay, Updated: 07 Nov, 2025 12:33 PM

tanda medical college

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में से एक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा एक बार फिर अव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है।

कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में से एक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा एक बार फिर अव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है। अस्पताल में मरीजाें के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध न होने का एक मामला सामने आया है, जिसका खुलासा एक महिला एम्बुलैंस चालक ने वीडियो बनाकर किया है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
वायरल हो रहे वीडियो में 108 एम्बुलैंस की चालक अंजू देवी अस्पताल परिसर में खड़ी अपनी एम्बुलैंस के पास से बोलती हुई दिखाई दे रही हैं कि वह एक मरीज को लेकर अस्पताल पहुंची हैं, लेकिन उसे अस्पताल के अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। वीडियो में अंजू ने आरोप लगाया कि यहां मरीज तड़पते रहते हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। हम मरीज को लेकर खड़े हैं और स्ट्रेचर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि बाद में मरीज काे व्हीलचेयर पर लेकर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस तरह की अव्यवस्था के कारण गंभीर मरीजाें की जान भी जा सकती है। इस वीडियो ने टांडा जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर दिया है। अगर प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल का यह हाल है तो दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति क्या होगी।

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा
जैसे ही यह वीडियो फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सांझा किया गया ताे लोगाें ने महिला चालक के साहस की प्रशंसा की और साथ ही अस्पताल प्रबंधन को जमकर कोस रहे हैं। यूजर्स ने कमेंट्स में लिखा कि यह शर्मनाक है कि एक मरीज को इलाज के लिए स्ट्रेचर जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

अस्पताल प्रशासन की चुप्पी
हालांकि, इस मामले पर अभी तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उम्मीद है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही अस्पताल प्रबंधन इस ओर ध्यान देगा और मरीजाें काे स्ट्रेचर जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरसना नहीं पड़ेगा।

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