Shimla: विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लिया स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला : सुक्खू

Edited By Kuldeep, Updated: 14 Sep, 2025 10:43 PM

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प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।

शिमला (ब्यूरो): प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह पहल सरकारी संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हुए उन्हें भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं और चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। यह निर्णय गहन चिंतन और विशेषज्ञों से हर पहलू पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया है।

वर्तमान प्रदेश सरकार हिमाचल के प्रत्येक बच्चे को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ नवीन योजनाएं लागू कर रही है। इस वित्त वर्ष शिक्षा क्षेत्र के लिए 9 हजार 849 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। चुनावी गारंटी के अनुरूप सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शुरूआत की गई है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने के उद्देश्य से हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा 500 प्राथमिक स्कूल, 100 उच्च विद्यालय, 200 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, 48 महाविद्यालयों और 2 संस्कृत महाविद्यालयों सहित कुल 850 शैक्षणिक संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान घोषित किया गया है। प्रदेश ने 99.30 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल की है। यह हिमाचल के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है।

राज्य सरकार ने पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए अध्यापकों को शैक्षणिक सत्र के बीच सेवानिवृत्त नहीं करने का भी निर्णय लिया है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में 334 अध्यापकों और 50 छात्रों को सिंगापुर भेजा गया। इसके अलावा 310 छात्रों तथा 32 अध्यापकों को शैक्षणिक भ्रमण पर केरल भेजा गया।

एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों को हिमाचल के स्थानीय संदर्भों के साथ प्रासंगिक बनाने पर भी विचार
आगामी सत्र से सरकार कक्षा छठी से 12वीं तक की एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों को हिमाचल के स्थानीय संदर्भों के साथ प्रासंगिक बनाने पर भी विचार कर रही है। इसके तहत किताबों में राज्य के प्राचीन मंदिरों, मठों, किलों, विरासत स्थलों, पारंपरिक वास्तुकला, बोलियों, लोक कलाओं, हस्तशिल्प, मेलों, त्यौहारों और ऐतिहासिक आंदोलनों की जानकारी शामिल होगी।

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