Shimla: राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकास की धुरी के रूप में किया स्थापित : सुक्खू

Edited By Kuldeep, Updated: 22 Mar, 2026 06:58 PM

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वास्तविक प्रगति उस अंतिम व्यक्ति की समृद्धि से मापी जाती है, जो कतार में सबसे पीछे खड़ा होता है। इस दृष्टिकोण के तहत सरकार केवल अनुदान नहीं दे रही, बल्कि ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही है, जहां ग्रामीण युवा कृषि और डेयरी को सम्मानजनक एवं...

शिमला (राक्टा): वास्तविक प्रगति उस अंतिम व्यक्ति की समृद्धि से मापी जाती है, जो कतार में सबसे पीछे खड़ा होता है। इस दृष्टिकोण के तहत सरकार केवल अनुदान नहीं दे रही, बल्कि ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही है, जहां ग्रामीण युवा कृषि और डेयरी को सम्मानजनक एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाएं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को शिमला में यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक दिशा को नई पहचान देने के उद्देश्य से वर्ष 2026-27 के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकास की धुरी के रूप में स्थापित किया है।

व्यवस्था परिवर्तन पर केंद्रित यह बजट गांव को समृद्धि का प्रमुख केंद्र बनाने में सहायक सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को वर्ष 2030 तक आत्मनिर्भर बनाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था परिवर्तन की इस पहल का केंद्र दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में ऐतिहासिक वृद्धि है। सरकार ने गाय के दूध की खरीद मूल्य को 51 रुपए से बढ़ाकर 61 रुपए प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का मूल्य 61 रुपए से बढ़ाकर 71 रुपए प्रति लीटर किया है। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली देसी नस्ल की गाय को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने ए-2 दूध के लिए 100 रुपए प्रति लीटर का विशेष मूल्य निर्धारित किया है।

किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए प्रोत्साहन राशि को 3 से बढ़ाकर 6 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह राशि सीधे किसानों के खाते में पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम, मक्की का समर्थन मूल्य 40 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति किलोग्राम तथा कच्ची हल्दी का समर्थन मूल्य 90 रुपए से बढ़ाकर 150 रुपए प्रति किलोग्राम किया गया है।

इसके अतिरिक्त पहली बार अदरक के लिए 30 रुपए प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। किसानों की आवाज को नीति-निर्माण में शामिल करने के लिए राज्य किसान आयोग के गठन की भी घोषणा की गई है। इसके साथ ही सामाजिक कल्याण के तहत मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना के माध्यम से राज्य के एक लाख जरूरतमंद परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और स्थायी आवास प्रदान किया जाएगा।

जिन्हें अभी जरूरत, उन्हें दी राहत
मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि नेता प्रतिपक्ष तो कहते रहते हैं, उनके सवाल का जवाब विधानसभा में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर.डी.जी. कटने के बाद बजट के माध्यम से उन लोगों को राहत देने का काम किया गया है, जिन्हें हमें लगा अभी जरूरत है। उन्होंने कहा कि बजट से 8 से 10 करोड़ कटने के बाद संतुलन बनाने केे लिए कई कदम उठाने पड़ते हैं। आगामी 6 माह में भी कई सुधार देखने को मिलेंगे। कई योजनाओं को स्वरूप बदलने जा रहा है। निश्चित तौर पर सरकार के प्रयासों से हिमाचल आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

3 वर्ष में 3800 करोड़ का राजस्व
मुख्यमंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश हित में कड़े फैसले भी लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और फैसलों से ही 3 वर्ष में 3800 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया गया है। उन्होंने कहा कि जो चोरी भ्रष्टाचार के दरवाजे से होती है, उसे हमने सत्ता में आते ही बंद किया। उन्होंने कहा कि हर वर्ग का उत्थान सरकार की प्राथमिकता है तथा इस ध्येय से सरकार लगातार आगे बढ़ रही है।

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