Shimla: पुनः नियुक्ति पर सेवानिवृत्त पटवारी से तहसीलदार को मिलेगा 40 से 70 हजार मासिक वेतन

Edited By Kuldeep, Updated: 06 Jan, 2026 11:30 PM

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हिमाचल प्रदेश में पुनः नियुक्ति पर रखे जाने वाले सेवानिवृत्त पटवारियों, कानूनगो, नायब तहसीलदारों व तहसीलदारों को 40 हजार से 70 हजार का मासिक वेतन मिलेगा। जानकारी है कि सरकार ने इनका वेतन तय कर दिया है।

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश में पुनः नियुक्ति पर रखे जाने वाले सेवानिवृत्त पटवारियों, कानूनगो, नायब तहसीलदारों व तहसीलदारों को 40 हजार से 70 हजार का मासिक वेतन मिलेगा। जानकारी है कि सरकार ने इनका वेतन तय कर दिया है। राजस्व से संबंधित मामलों को निपटाने के लिए प्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को पुनः नियुक्ति पर रखने का फैसला लिया है। हिमाचल प्रदेश पटवारी और कानूनगो संयुक्त महासंघ तहसीलदारों की पुनः नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं। सरकार ने लंबित राजस्व मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सेवानिवृत्त तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी को मासिक वेतन पर रखने का निर्णय लिया है।

इसके तहत पुनः नियुक्त तहसीलदार को 70 हजार रुपए, नायब तहसीलदार को 60 हजार रुपए, कानूनगो को 50 हजार रुपए और पटवारी को 40 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। यह राशि बिना किसी प्रमोशन, वार्षिक वेतन वृद्धि या अतिरिक्त जिम्मेदारी के तय की गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश पटवारी एवं कानूनगो संयुक्त महासंघ ने सरकार के इस फैसले को अन्यायपूर्ण करार दिया है। संघ का कहना है कि जो कर्मचारी वर्षों से सेवा में हैं, उन्हें न तो समय पर पदोन्नति मिल रही है और न ही वेतन विसंगतियां दूर की जा रही हैं। सेवानिवृत्त तहसीलदारों को पुनः नियुक्त करने से उनकी पदोन्नति पर असर पड़ेगा तथा कई कानूनगो बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। संघ ने सरकार के इस फैसले को नियमित कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ने वाला करार दिया है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से नियमित भर्तियां करने की मांग की है।

सरकार के प्रयासों के बावजूद भारी संख्या में लंबित पड़े हैं मामले
प्रदेश सरकार ने सत्ता में आते ही राजस्व विभाग में सुधार की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत लंबित मामलों को निपटाने के लिए विशेष राजस्व अदालतें आयोजित की जा रही हैं, वहीं विभाग में कई कार्य ऑनलाइन भी किए हैं। इसके अलावा कई प्रमाण पत्र बनाने की समय अवधि भी तय की गई है। इसके बावजूद राजस्व विभाग में 66 हजार से अधिक मामले लंबित पड़े हैं। इसे देखते हुए सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुनः नियुक्त करने का निर्णय लिया है, जिन्हें आवश्यकता के आधार पर तैनाती दी जानी है।

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