Shimla: आऊटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

Edited By Kuldeep, Updated: 01 Jan, 2026 10:54 PM

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प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि आऊटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए क्या कोई पॉलिसी चलन में है।

शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि आऊटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए क्या कोई पॉलिसी चलन में है। कोर्ट ने आऊटसोर्स कर्मियों की सेवाओं की वैद्यता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के पश्चात सरकार से पूछा है कि क्या किसी आऊटसोर्स कर्मचारी को नियमित किया गया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने इसे जरूरी जानकारी बताते हुए कहा कि इस पहलू पर सही जानकारी होने से मुख्य मुद्दे पर फैसला करने में मदद मिलेगी। कोर्ट ने कहा कि मुद्दा यह है कि क्या स्वीकृत पदों को आऊटसोर्सिंग द्वारा भरा जा सकता है, जबकि नियम ऐसा करने की अनुमति नहीं देते हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एचपी फाइनांशियल रूल्स, 2009 (नियम-112) सरकार के लिए कोई मददगार नहीं होगा, जो स्पष्ट रूप से 'आपातकाल का नियम' है। आऊटसोर्स का सहारा बड़े पैमाने पर रोजगार के लिए नहीं लिया जा सकता, जो संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। इससे न केवल आऊटसोर्स आधार पर रखे गए कर्मचारियों का शोषण होता है, बल्कि उन्हें नियमित कर्मचारियों की सैलरी से बहुत कम सैलरी मिलती है, जो नियमों के तहत निर्धारित पे स्केल पर आधारित है। इस प्रकार यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का खुला उल्लंघन है। आऊटसोर्स माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मियों की भर्तियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद-21 का भी उल्लंघन है, यानी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के जीवन का अधिकार, जिन्हें ऐसे आऊटसोर्स स्टाफ नर्स कर्मचारियों से निपटना पड़ता है।

जिन पर किसी भी तरह का विभागीय नियंत्रण नहीं होता, जैसे कि उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करना, जो केवल कथित एजैंसियों की संतुष्टि की कमी के कारण उनकी सेवाओं को समाप्त करने तक ही सीमित है। कोर्ट ने सरकार से शपथ पत्र पर उपरोक्त जानकारी के साथ-साथ यह बताने को भी कहा है कि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में कितनी स्टाफ नर्सों के नियमित पद भरे गए हैं, ताकि राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की जा सके। उन आऊटसोर्स कर्मियों की संख्या का उल्लेख करने को भी कहा गया है, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विभागवार नियोजित किया गया है, जो अभी भी सेवा में हैं और साथ ही उस अवधि का भी उल्लेख करने के आदेश दिए गए हैं, जब से वे सेवा में शामिल हुए हैं।

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