Edited By Kuldeep, Updated: 04 Apr, 2025 04:48 PM

राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्पैशल वार्ड में भर्ती हिमकेयर और पी.एम. जन आरोग्य योजना के मरीजों को नि:शुल्क उपचार की सुविधा नहीं मिलेगी, अपितु सामान्य वार्ड के भर्ती मरीजों को नि:शुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
शिमला (संतोष): राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्पैशल वार्ड में भर्ती हिमकेयर और पी.एम. जन आरोग्य योजना के मरीजों को नि:शुल्क उपचार की सुविधा नहीं मिलेगी, अपितु सामान्य वार्ड के भर्ती मरीजों को नि:शुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसे लेकर आदेश जारी कर दिए है, जिसके तहत पहली अप्रैल से ऐसे मरीजों को मुफ्त इलाज नहीं दिया जा रहा है। बता दें कि अस्पतालों में बने स्पैशल वार्डों से अस्पताल को आय होती है, जिससे राजस्व में इजाफा होता है। इसी को देखते हुए क्लाज-एम को हटाते हुए हिमकेयर व पीएम जन कार्ड धारकों के लिए इस सुविधा को हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री हिमाचल हैल्थकेयर स्कीम (हिमकेयर) और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम जन) के अंतर्गत सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को 5 लाख रुपए तक कैशलैस ट्रीटमैंट की सुविधा है।
8 मार्च 2019 को इसके लिए स्टैंडर्ड ऑप्रेटिंग प्रोटोकॉल (एसओपी) जारी की गई है, जिसके तहत क्लाज-एम को हटा दिया गया है। इसके हटने के बाद अब स्पैशल वार्ड में भर्ती हिमकेयर और पी.एम. जन कार्ड धारक को मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा। जो मरीज स्पैशल वार्ड से बाहर सामान्य वार्ड में भर्ती होंगे, उन्हें पहले की तरह मुफ्त उपचार की सुविधा मिलती रहेगी। राज्य में हिमकेयर योजना के तहत 8.53 लाख कार्ड धारक है। इनमें से जो मरीज स्पैशल वार्ड में भर्ती होगा, उन्हें कैशलैस नि:शुल्क उपचार नहीं मिलेगा। इन दोनों योजनाओं में मरीज का सरकारी अस्पताल में 5 लाख रुपए तक का उपचार मुफ्त होता है।
दोनों योजनाओं में गड़बड़ी के चलते निजी अस्पतालों में पहले ही बंद है नि:शुल्क उपचार
आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार ने यह कदम उठाया है और स्पैशल वार्ड को लेकर उपचार करवाने वाले साधन संपन्न लोगों के लिए यह सुविधा हटा दी गई है। इन दोनों योजनाओं में गड़बड़ी सामने आने के बाद निजी अस्पतालों में भी नि:शुल्क उपचार की सुविधा पहले ही बंद की गई है। राज्य में 354 करोड़ रुपए से ज्यादा की देनदारी इन दोनों योजनाओं की हो गई है। राज्य सरकार अस्पतालों को पूरे पैसों का भुगतान नहीं कर पा रही है। सरकारी अस्पतालों की 227 करोड़ रुपए और प्राइवेट अस्पतालों की 127 करोड़ रुपए का भुगतान राज्य सरकार के पास लंबित पड़ा है।