Shimla: हाईकोर्ट का राज्य सरकार और अधिकारियों को नोटिस, उपायुक्त और वन संरक्षक क

Edited By Kuldeep, Updated: 08 Jan, 2026 10:36 PM

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हाईकोर्ट ने पौंग डैम वन्यजीव अभयारण्य और वैटलैंड के अवैध अतिक्रमणकारियों व शिकारियों के खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश जारी करने की मांग को लेकर दायर आवेदन में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने पौंग डैम वन्यजीव अभयारण्य और वैटलैंड के अवैध अतिक्रमणकारियों व शिकारियों के खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश जारी करने की मांग को लेकर दायर आवेदन में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने उपायुक्त और वन संरक्षक को आदेश दिए हैं कि वे वैटलैंड क्षेत्र पर लगाई सभी बाड़ को तुरंत प्रभाव से हटाएं। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं कि उक्त क्षेत्र में कोई फसल न उगाई जाए, क्योंकि ऐसी फसलों में कीटनाशक और खरपतवारनाशक दोनों का उपयोग किया जा रहा है, जिसका वन्यजीवों पर घातक प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि वैसे भी उक्त व्यक्तियों को वैटलैंड का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है जो उनकी नहीं है और वे अतिक्रमणकारी हैं।

कोर्ट ने तदनुसार, आवश्यक कारण बताओ नोटिस जारी करके कानून के अनुसार कदम उठाने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने यह भी आदेश दिए हैं कि कोई भी दीवानी अदालत उक्त व्यक्तियों के खिलाफ कोई निषेधाज्ञा जारी नहीं करेगा। कोर्ट ने वन विभाग को वैटलैंड्स पर खेती की सीमा दिखाने के लिए ड्रोन से तस्वीरें लेने के आदेश भी दिए हैं। आवेदन में कहा गया है कि पौंग डैम में वन्यजीव जानवरों का शिकार कुछ खाने योग्य सामग्री से लेपित विस्फोटक पदार्थों से किया गया है ताकि पक्षियों और वन्यजीवों को लुभाया जा सके। ऐसी सामग्री खाने से जिन गायों को नुक्सान हुआ है, उनकी तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं। यह भी बताया गया है कि वैटलैंड की अवैध खेती की आड़ में, स्थानीय निवासी और अन्य लोग उस भूमि का उपयोग कर रहे हैं जो वन्यजीव अभ्यारण्य के लाभ के लिए है, खासकर उत्तरी गोलार्ध जैसे रूस से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए, जिनका बिना किसी रोक-टोक के शिकार किया जा रहा है। कोर्ट को बताया गया कि उपायुक्त कांगड़ा, जो वन विभाग सहित वैटलैंड क्षेत्रों के प्रभारी हैं और वन वन्यजीव संरक्षक धर्मशाला, दोनों स्तरों पर नियंत्रण की कमी है।

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