Edited By Swati Sharma, Updated: 23 Jan, 2026 02:01 PM

Viral Video: मनाली की बर्फीली वादियों से सामने आए एक सोशल मीडिया वीडियो ने पर्यटन स्थलों पर कंटेंट क्रिएशन की सीमाओं और सांस्कृतिक मर्यादाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इंस्टाग्राम पर वायरल हुए इस वीडियो में एक महिला को बर्फबारी के बीच आपत्तिजनक...
Viral Video: मनाली की बर्फीली वादियों से सामने आए एक सोशल मीडिया वीडियो ने पर्यटन स्थलों पर कंटेंट क्रिएशन की सीमाओं और सांस्कृतिक मर्यादाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इंस्टाग्राम पर वायरल हुए इस वीडियो में एक महिला को बर्फबारी के बीच आपत्तिजनक तरीके से रील बनाते हुए देखा गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पहले साड़ी उतारी और फिर करने लगी मस्ती
जानकारी के अनुसार, यह वीडियो मेघा रानी नाम की एक इंस्टाग्राम यूजर ने अपने पेज पर पोस्ट किया है। ये वीडियो पिछले साल 6 दिसंबर का बताया जा रहा है। वीडियो में महिला पहले साड़ी में नजर आती है, जिसके बाद वह साड़ी उतारकर बिकनी में बर्फ के बीच नृत्य और मस्ती करती दिखाई देती है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और अब तक इसे 10 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है, जबकि महिला के इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 41 हजार फॉलोअर्स हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आईं। कुछ यूजर्स ने इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और कंटेंट क्रिएशन से जोड़ा, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने इसे सार्वजनिक स्थल की गरिमा और देवभूमि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ बताया। वीडियो पर की गई टिप्पणियों में कई यूजर्स ने कड़ी आपत्ति जताई। कुछ ने इसे “सार्वजनिक स्थानों की मर्यादा तोड़ने” वाला कृत्य बताया, जबकि कई अन्य यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताते हुए आपत्तिजनक व्यवहार की आलोचना की।
इस विवाद को और हवा तब मिली जब निखिल सैनी नाम के एक यूजर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह वीडियो साझा करते हुए लिखा कि पर्यटन स्थल पारिवारिक और सांस्कृतिक स्थान होते हैं, न कि सस्ते कंटेंट और वायरल लोकप्रियता के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मंच। उन्होंने ऐसे वीडियो को पर्यटन स्थलों की छवि खराब करने वाला बताया। फिलहाल इस मामले में किसी भी तरह की आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह घटना एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट, अभिव्यक्ति की आज़ादी और सार्वजनिक स्थानों की मर्यादा के बीच संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।