Edited By Jyoti M, Updated: 01 Mar, 2026 11:26 AM

हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में शनिवार को प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। गोंदला क्षेत्र के ठीक सामने पीर पंजाल की ऊँची चोटियों पर स्थित सदियों पुराने यानदे गंग हिमनद (ग्लेशियर) का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इस घटना ने पूरे इलाके में...
हिमाचल प्रदेश (लाहौल-स्पीति): हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में शनिवार को प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। गोंदला क्षेत्र के ठीक सामने पीर पंजाल की ऊँची चोटियों पर स्थित सदियों पुराने यानदे गंग हिमनद (ग्लेशियर) का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी।
घटना का प्रभाव और विस्तार
पहाड़ की चोटी से बर्फ का विशाल हिस्सा टूटने के बाद आए इस एवलांच का मलबा सीधे चंद्रा नदी तक जा पहुँचा। हिमस्खलन इतना भीषण था कि इससे उठा बर्फीला गुबार और हवा का दबाव नदी के दूसरी ओर स्थित गांवों—रालिंग, खंगसर, जांगला और मूर्तिचा तक महसूस किया गया। गनीमत यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी भी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
विशेषज्ञों की राय और कारण
स्थानीय पंचायत प्रधान सूरज ठाकुर के अनुसार, हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद अचानक बढ़े तापमान के कारण यह हिमखंड अस्थिर होकर गिर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में आए बदलाव और बढ़ती गर्मी ग्लेशियरों के पिघलने का मुख्य कारण है।
घाटी में इस तरह के एवलांच को सामान्य माना जाता है, लेकिन ग्लेशियरों का लगातार सिकुड़ना पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ा खतरा है।
मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, हिमाचल के मैदानी इलाकों में पारा चढ़ना शुरू हो गया है, जहाँ ऊना में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है। आने वाले 6 मार्च तक मौसम साफ रहने का अनुमान है, जिससे बर्फ के और अधिक पिघलने और अस्थिर होने की संभावना बनी रह सकती है।