खाकी शर्मसार: प्रशिक्षु महिला को हेड कांस्टेबल ने भेजे अश्लील मैसेज, किया निलंबित

Edited By Jyoti M, Updated: 25 Feb, 2026 11:32 AM

head constable sends obscene messages to female trainee suspended

जब रक्षक ही मर्यादा की सीमाएं लांघने लगे, तो खाकी की साख पर सवाल उठना लाजिमी है। हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (PTC) डरोह में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले एक हेड कांस्टेबल पर अपनी ही जूनियर...

हिमाचल डेस्क। जब रक्षक ही मर्यादा की सीमाएं लांघने लगे, तो खाकी की साख पर सवाल उठना लाजिमी है। हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (PTC) डरोह में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले एक हेड कांस्टेबल पर अपनी ही जूनियर प्रशिक्षु (ट्रेनी) महिला कांस्टेबल के साथ डिजिटल दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है। मामले की गंभीरता को भांपते हुए उत्तरी रेंज की डीआईजी सौम्या सांबशिवन ने त्वरित एक्शन लेते हुए आरोपी हेड कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

एक महिला प्रशिक्षु कांस्टेबल, जो डरोह में अपने करियर की बारीकियां सीखने आई थी, पिछले कुछ समय से मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रही थी। आरोप है कि संस्थान में तैनात एक हेड कांस्टेबल उसे व्हाट्सएप पर लगातार आपत्तिजनक और अश्लील संदेश भेज रहा था।

करीब पांच दिन पहले पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर डीआईजी नॉर्थ रेंज को एक औपचारिक शिकायत सौंपी। शिकायत के साथ व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट्स और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी संलग्न किए गए हैं, जो प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि करते हैं। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए हेड कांस्टेबल को तुरंत प्रभाव से पद से हटा दिया गया है।

जांच के मुख्य बिंदु

विभाग अब इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रहा है। जांच का केंद्र इन बिंदुओं पर रहेगा। 

"जीरो टॉलरेंस" की नीति

पुलिस महकमे के उच्चाधिकारियों का कहना है कि डिजिटल माध्यम से होने वाले किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ विभाग 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रहा है। विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आरोपी के खिलाफ भविष्य की कानूनी रूपरेखा तय की जाएगी।

महिला आयोग की प्रतिक्रिया

राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा विद्या नेगी ने डीआईजी सौम्या सांबशिवन की संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय की सराहना की है। उन्होंने विश्वास जताया है कि इस पारदर्शी जांच से पीड़िता को उचित न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगेगी।

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