PWD मल्टी टास्क वर्कर्ज ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, शिमला के चौड़ा मैदान में भारी बारिश के बीच किया प्रदर्शन

Edited By Vijay, Updated: 20 Mar, 2026 05:54 PM

pwd multi task workers opened front against government

राज्य के लोक निर्माण विभाग में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर्ज ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर भारी बारिश के बावजूद विधानसभा के बाहर चौड़ा मैदान में शांतिपूर्वक ढंग से प्रदर्शन किया।

शिमला (संतोष): राज्य के लोक निर्माण विभाग में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर्ज ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर भारी बारिश के बावजूद विधानसभा के बाहर चौड़ा मैदान में शांतिपूर्वक ढंग से प्रदर्शन किया। बजट सत्र के दौरान समस्त लोनिवि मल्टी टास्क वर्कर्ज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपकर अपनी दयनीय स्थिति से अवगत करवाया और जल्द से जल्द न्याय की गुहार लगाई है।

स्थायी पॉलिसी बनाने और दैनिक वेतन हैं प्रमुख मांगें 
मल्टी टास्क वर्कर्ज यूनियन के अध्यक्ष शेर सिंह का कहना है कि वे पिछले लगभग 4 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में स्थायी पॉलिसी का निर्माण करना है। सरकार इन वर्कर्ज के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अतिशीघ्र एक स्थायी पॉलिसी बनाए। वर्कर्ज ने मांग की है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से न्यूनतम दैनिक भोगी के दायरे में लाया जाए। आयु सीमा में राहत प्रदान की जाए, क्योंकि विभाग में लगभग 30 प्रतिशत वर्कर्ज ऐसे हैं, जिनकी उम्र 48 से 49 वर्ष हो चुकी है। सरकार इन अधिक आयु वाले वर्कर्ज के लिए विशेष पॉलिसी बनाकर उन्हें विभाग में शामिल करे। ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले वर्कर्ज के परिजनों को करुणामूलक आधार पर नौकरी दी जाए। जोखिम भरे कार्य को देखते हुए चोट लगने या बीमार होने की स्थिति में मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए।

महंगाई के दौर में कम वेतन से गुजारा मुश्किल
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में वर्कर्ज ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे प्रतिदिन 8 से 10 घंटे कड़ी ड्यूटी करते हैं, लेकिन उसके बदले मिलने वाला वेतन इस महंगाई के दौर में बेहद कम और अपर्याप्त है। वर्कर्ज का कहना है कि यदि वेतन में सम्मानजनक बढ़ौतरी नहीं की गई तो उनके लिए परिवार का राशन जुटाना भी मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि प्रदेश के लगभग 90 प्रतिशत मल्टी टास्क वर्कर्ज भारी आर्थिक बोझ तले दबे हुए हैं और उनकी स्थिति दिन-ब-दिन दयनीय होती जा रही है।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो भविष्य में ठोस नीति अपनाने को होंगे बाध्य 
मल्टी टास्क वर्कर्ज ने आशा व्यक्त की है कि मार्च 2026 के इस बजट सत्र में सरकार उनकी इन मांगों को पूर्ण करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे लंबे समय से इन मांगों को दोहरा रहे हैं और अब वे ठोस निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो भविष्य में ठोस नीति अपनाने को बाध्य हो जाएंगे।

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