जाति की बजाय आर्थिक आधार पर हो आरक्षण : शांता कुमार

Edited By Kuldeep, Updated: 11 Dec, 2021 07:21 PM

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पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि सवर्ण आयोग की मांग पर इतना बड़ा ऐतिहासिक प्रदर्शन धर्मशाला में हुआ जिसके दबाव में सरकार को उसी समय उनकी मांग स्वीकार करनी पड़ी।

पालमपुर (सुरेश): पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि सवर्ण आयोग की मांग पर इतना बड़ा ऐतिहासिक प्रदर्शन धर्मशाला में हुआ जिसके दबाव में सरकार को उसी समय उनकी मांग स्वीकार करनी पड़ी। ऐसा प्रदेश में पहले कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि देश की लगभग 80 प्रतिशत जनता जाति आधारित आरक्षण से परेशान है। समय आ गया है कि अब जाति आधारित आरक्षण को पूरी तरह समाप्त कर केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की व्यवस्था की जाए।

शांता कुमार ने कहा कि इतने लम्बे समय से आरक्षण का लाभ उठाने के बाद भी आरक्षित जातियों के गरीबों को पूरा लाभ नहीं मिला। ग्लोबल हंगर इंडैक्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया के सबसे गरीब 130 देशों में नीचे 117 क्रमांक पर है। उसी रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 19 करोड़ 40 लाख लोग भूखे पेट सोते हैं।  इनमें एक अनुमान के अनुसार 12 करोड़ लोग आरक्षित जातियों के हैं। आरक्षित जातियों में आरक्षण का लाभ ऊपर के लोगों को हुआ। कई बार यह मांग हुई कि उन जातियों की क्रिमीलेयर अर्थात अमीरों को आरक्षण से वंचित किया जाए परन्तु सभी पार्टियों के आरक्षित जातियों के नेता उसी क्रिमीलेयर से आते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा था परन्तु वह क्रिमीलेयर आज भी आरक्षण का लाभ उठा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश एक तरफ आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और दूसरी तरफ 19 करोड़ गरीब भूखे पेट सोते हैं। उन्होंने देश के नेताओं से आग्रह किया है कि जाति आधारित आरक्षण को तुरन्त समाप्त किया जाए, नहीं तो धर्मशाला जैसे आन्दोलन पूरे देश में होंगे और अब होने भी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण आन्दोलन को शुरू होने से पहले ही वह पूरे समर्थन की घोषणा करते हैं।

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