'RDG को बंद करना आर्थिक आतंकवाद का एक रूप', BJP पर बरसे भवानी पठानिया

Edited By Swati Sharma, Updated: 19 Feb, 2026 05:44 PM

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हिमाचल डेस्क: हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत से जुड़े राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। इसी बीच फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक और प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह...

हिमाचल डेस्क: हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत से जुड़े राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। इसी बीच फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक और प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद करने पर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरडीजी को बंद करना आर्थिक आतंकवाद का एक रूप है।

'भाजपा अभी पॉलिटिकल पार्टी नहीं बची'

भवानी सिंह पठानिया ने कहा, " प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अभी पॉलिटिकल पार्टी नहीं बची है। केवल एक या दो व्यक्ति पार्टी को चलाते हैं। उनका फरमान सभी कार्यकताओं को मानना पड़ता हैं। अगर पार्टी लाइन से कोई बाहर जाता है तो उसकी टिकट काट दी जाती है या फिर उसको बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।" उन्होंने कहा, "भाजपा के विधायकों और कार्यकर्ताओं की हालत ऐसी हो गई हैं, जैसे सांप के गले में कोकड़ी फंस गई है, ना ही इसे निगल सकते हैं और ना ही उगल सकते हैं। अगर यह लोग आरडीजी का समर्थन कर रहे हैं तो यह लोग हर एक हिमाचलवासी को यह बता रहे हैं कि हमने हिमाचल का भविष्य गिरवी रखवा दिया है। लगभग 50 हजार करोड़ का नुकसान अगले 5 साल में होगा। अगर भाजपा के कार्यकर्ता आरडीजी का विरोध करते हैं तो या तो इनकी टिकट काट दी जाएगी या तो इन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा। यही कारण ही भाजपा के कार्यकर्ताओं के मुंह से चूं नहीं निकल रही।"

RDG बंद करने की बताई वजह

भवानी ने आगे कहा, "भाजपा पार्टी की आंखों में हिमाचल खटकता है। इनका मिशन था कि भारत को कांग्रेस मुक्त करें, लेकिन जब यह नहीं कर पाए तो इन्होंने सोचा नॉर्थ इंडिया को कांग्रेस से मुक्त करते हैं। उसके बीच में हिमाचल आ गया। इनकी कोशिश यही है कि हिमाचल की कांग्रेस सरकार को किसी ना किसी तरीके से गिराया जाए।"

भवानी पठानिया ने कहा," भाजपा की श्रृंखला की पहली कड़ी थी ऑपरेशन लोटस। हर राज्य में यह सफल हुए, लेकिन इन्होंने मार खाई तो वो है हिमाचल प्रदेश...इससे इनका गुस्सा बढ़ गया। जब इनका गुस्सा बढ़ा तो इन्होंने सोचा कि अब अगर हिमाचल को मारना है तो इसको आर्थिक रूप से मारना शुरू करो, जिससे त्राहिमाम मच जाए कि यह सरकार अच्छा काम नहीं कर रही। इसी कड़ी में इन्होंने एक्शन लिए। पहला एक्शन लिया कि इन्होंने मनरेगा बंद कर दी। अब यह बोल रहे कि हमने मनरेगा बंद नहीं किया। दूसरा इन्होंने आरडीजी बंद कर दी। तीसरी चोट इन्होंने हमारे बागवानों और किसानों को पहुंचाई। चौथा, जब हमने OPS दी तो इन्होंने क्या किया जितना हम लोन ले सकते थे, उसमें 1800 करोड़ प्रतिवर्ष की कटौती कर दी।"

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