Edited By Vijay, Updated: 29 Nov, 2025 07:03 PM

पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि झूठी गारंटियों के नाम पर सत्ता में आई व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार कर और कर्ज की सरकार बन गई है।
धर्मशाला (ब्यूरो): पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि झूठी गारंटियों के नाम पर सत्ता में आई व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार कर और कर्ज की सरकार बन गई है। धर्मशाला में जारी अपने प्रैस बयान में उन्होंने कहा कि 3 साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने सिर्फ बेतहाशा कर्ज लिए हैं और प्रदेशवासियों पर लगातार कर लादे हैं। पूर्व सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं को बंद करना, संस्थानों पर ताले लगाने के अलावा यह सरकार 3 साल में कुछ नहीं कर पाई है। यह सरकार की एक ही उपलब्धि है कि हर महीने 1000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज ले रही है। 35 महीने के कार्यकाल में सुख की सरकार के कर्ज का आंकड़ा 40000 करोड़ रुपए के पार पहुंच रहा है। सुक्खू सरकार देश की इकलौती सरकार है, जिसने जीएसटी घटने के बाद भी सीमैंट के दाम पर एजीटी बढ़ाकर आपदाग्रस्त प्रदेश के लोगों के घर बनाने की राह कठिन की है।
राजस्व विभाग कर रहा जश्न पर होने वाले खर्च का वहन
जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरा प्रशासनिक अमला 3 साल के जश्न की तैयारी में लगा है। मुख्यमंत्री से लेकर हर विभाग के आखिरी पंक्ति का खड़ा कर्मचारी इस जश्न को सफल बनाने में जुटा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस जश्न पर होने वाले खर्च का वहन राजस्व विभाग कर रहा है। यह बातें हम नहीं सरकार के आधिकारिक दस्तावेज बता रहे हैं, लेकिन दुख इस बात का है कि यह विभाग जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अभी तक मुआवजा नहीं दे पाया है। जो विभाग आपदा का दंश झेलने वाले लोगों को फौरी राहत के तौर पर अढ़ाई हजार की धनराशि समय से नहीं दे पाया, वही विभाग लोगों के टूटे हुए घरों, मलबे में दबी लाशों और अपने खो चुके लोगों के दुखों को अनदेखा कर करोड़ों रुपए खर्च कर जश्न मनाएगा।
आरएसएस के खिलाफ मर्यादाहीन टिप्पणी स्वीकार नहीं
जयराम ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का एक प्रतिष्ठित, अनुशासित और राष्ट्रसेवा को समर्पित दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है, जिसने समाज के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। लाखों स्वयंसेवक शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत, सामाजिक समरसता, स्वावलंबन और सांस्कृतिक जागरण जैसे क्षेत्रों में निरंतर नि:स्वार्थ सेवा करते आ रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री भी इसी संगठन से जुड़े हैं। आरएसएस का मूल सिद्धांत ‘एकात्म मानववाद’ हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान देने की भावना पर आधारित है। संघ के बारे में किसी भी प्रकार की गलत टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।