बच्चे के पेट में फंसी थी लॉलीपॉप की पाइप, डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर निकाली

Edited By prashant sharma, Updated: 16 May, 2020 11:37 AM

lollipop pipe stuck in baby s stomach doctors carried out operation

नाहन में डॉक्टरों की टीम ने एक 11 वर्षीय बच्चे के पेट में फंसी लॉलीपॉप की पाइप निकालकर उसे नया जीवन दिया है। सीमित संसाधनों के बीच यह ऑपरेशन करना डॉक्टरों की टीम के लिए एक उपलब्धि से कम नहीं है।

नाहन : नाहन में डॉक्टरों की टीम ने एक 11 वर्षीय बच्चे के पेट में फंसी लॉलीपॉप की पाइप निकालकर उसे नया जीवन दिया है। सीमित संसाधनों के बीच यह ऑपरेशन करना डॉक्टरों की टीम के लिए एक उपलब्धि से कम नहीं है। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन के डॉक्टरों की टीम ने 11 वर्षीय बच्चे को न केवल नया जीवन दिया है, बल्कि गरीब परिवार का लाखों रुपए खर्च होने से भी बचा लिया है। इतना ही नहीं, यहां इस प्रकार की यह पहली सर्जरी होगी, सर्जन व प्रोफेसर डॉ. राजन सूद की निगरानी में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. शैलेंद्र काैशक, एनैस्थिसीया से डॉ. विक्रमजीत अरोड़ा, स्टाफ नर्स प्रियंका की टीम ने सर्जरी को अंजाम दिया है। 

जानकारी के अनुसार, शिलाई क्षेत्र के कोटी उतराव गांव से 11 वर्षीय अंकुश पेट की दर्द से परेशान था। पड़ताल में पता चला कि बच्चे ने लॉलीपॉप के साथ करीब 4 सेंटीमीटर की प्लास्टिक पाइप को गलती से निगल लिया था। इसके बाद बच्चे का एक्स-रे किया गया, लेकिन कुछ साफ नहीं हो पाया। अल्ट्रासांऊड में सिर्फ इतना ही पता चला कि आंत फट चुकी है, लेकिन कहां से आंत फटी है, यह पता नहीं चल पा रहा था। इसके बाद टीम ने यहां सीमित संसाधनों के बावजूद ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। 

टीम ने ऑपरेशन के दौरान पाया कि प्लास्टिक की पाइप रैक्टम में फंसी है और पाइप से यह फट चुकी थी। टीम ने पेट से मल की सफाई की और मल निकासी के रास्ते को बंद किया और अंदर भी टांके लगाए गए। इसके अलावा मल निकासी का रास्ता पेट से बनाया गया. चिकित्सको के अनुसार, यदि ऑपरेशन में थोड़ी भी देरी होती तो मल अंदर पेट में फैल सकता था, जिससे संक्रमण का खतरा अधिक था। ऐसे मामलों में कई बार रोगी याददाश्त खो सकता है तो जान का भी खतरा रहता है। आम तौर पर इस प्रकार की सर्जरी नाहन में नहीं होती है। ऐसे मामलों को अक्सर पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर किया जाता रहा है। लेकिन यहां चिकित्सकों की टीम ने कई सर्जरी की हैं। डॉक्टरों ने मल निकासी के रास्ते को पेट से बनाने के बाद कुछ सामान 108 एंबुलेंस कर्मियों की मदद से चंडीगढ़ से मंगवाया और बाद में सफल सर्जरी को अंजाम दिया।
 

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