Edited By Vijay, Updated: 13 Jan, 2023 07:59 PM

हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में वर्ष 2023 का पहला पर्व लोहड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान लोगों ने "सुंदर मुंदरिए हो तेरा कौन विचारा हो" पराम्परिक लोहड़ी गाकर खूब जश्न मनाया।
शिमला (अम्बादत): हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में वर्ष 2023 का पहला पर्व लोहड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान लोगों ने "सुंदर मुंदरिए हो तेरा कौन विचारा हो" पराम्परिक लोहड़ी गाकर खूब जश्न मनाया। शिमला में राम बाजार से लेकर लोअर बाजार और शेर-ए-पंजाब तक लोगों ने जगह-जगह लोहड़ी जलाई। इस दौरान लोगों ने मूंगफली, रेवड़ी, गज्जक के साथ एक-दूसरे का मुंह मीठा किया। इसके साथ ही ढोल-नगाड़ों और संगीत की धुनों पर लोगों ने जमकर डांस किया। वहीं शिमला घूमने आए पर्यटकों ने भी इस पर्व का आनंद उठाया।
बच्चों ने टोलियां बनाकर घर-घर जाकर मांगी लोहड़ी
शिमला के उपनगरों में भी लोगों ने इकट्ठे होकर इस पर्व को धूमधाम से मनाया। इस मौके पर लोगों ने एक जगह इक्ट्ठा होकर लोहड़ी जलाई और एक-दूसरे को इस पर्व की शुभकामनाएं दीं। शाम होते ही लोगों ने मुहूर्त के अनुसार अग्नि जलाकर, रेवड़ियों और मूगंफली की आहुति डाली और इसके चारों ओर परिक्रमा की। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को गुड़, गज्जक, मूंगफली, रेवड़ी का प्रसाद बांटा। वहीं बच्चे भी इस दौरान काफी उत्साहित दिखे। बच्चों ने टोलियां बनाकर घर-घर जाकर लोहड़ी मांगी। इसके अतिरिक्त बाजारों में सुबह से ही लोहड़ी पर्व के लिए सामान खरीदने को लोगों की भीड़ लगी रही।
बदलते दौर में विलुप्त हुई लोहड़ी मांगने की परंपरा
बदलते दौर में लोहड़ी मांगने की परम्परा खत्म होती जा रही है। पहले बच्चे घर-घर, गलियों व सडकों में जाकर लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी मांगते थे और फिर लोहड़ी से मिले पैसों से गुड़, तिल, रेवड़ी, गज्जक, मूंगफली एक साथ मिलकर खाते थे लेकिन आज के बदलते दौर में लोहड़ी मांगने की यह परंपरा विलुप्त हो गई है, ऐसे में अब बच्चे कम ही लोहड़ी मांगते हुए दिखाई देते हैं।
मकर संक्राति पर घी के साथ खिचड़ी खाने की मान्यता
लोहड़ी पर्व के बाद शनिवार को प्रदेशभर में मकर संक्राति मनाई जाएगी। इस अवसर पर प्रदेश के लोग पारम्परिक तरीके से अन्न की पूजा कर इसका दान करते हैं। मकर संक्रांति पर्व पर तिल, गुड़ और मूंगफली का विशेष महत्व होता है। सर्दियों के समय आने वाले इस त्यौहार में घी के साथ खिचड़ी खाने की मान्यता है। इस अवसर पर धार्मिक स्नान करने का भी महत्व रहता है।
तत्तापानी शिमला में विशेष आयोजन
मकर संक्राति पर विशेष तौर पर तत्तापानी शिमला में इस पर्व का आयोजन किया जाएगा। तत्तापानी के लिए लोहड़ी की रात को ही लोग निकल जाते हैं तथा सुबह ब्रह्ममुर्हत में लोग गर्म पानी के चश्मों में स्नान करते है। मान्यता है कि तातापानी में निकले गर्म पानी के चश्मों में नहाने से शरीर के कई चरम रोग कट जाते हैं। इसके अलावा मकर सक्रांति के दिन तुलादान करने का भी विशेष महत्व है।
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