कुमारहट्टी हादसा: 13 सैनिकों के परिजनों को नहीं दी जा सकी फौरी राहत

Edited By Ekta, Updated: 18 Jul, 2019 10:35 AM

kumarhatti incident

जिला प्रशासन को अभी तक कुमारहट्टी हादसे में मारे गए 13 सैनिकों के घरों का पता नहीं मिला है। इस कारण इन सैनिकों के परिजनों को फौरी राहत नहीं दी जा सकी है। प्रशासन ने सेना से इन सैनिकों के घर के स्थायी पते के साथ परिवार की सूची मांगी है ताकि राहत राशि...

सोलन (पाल): जिला प्रशासन को अभी तक कुमारहट्टी हादसे में मारे गए 13 सैनिकों के घरों का पता नहीं मिला है। इस कारण इन सैनिकों के परिजनों को फौरी राहत नहीं दी जा सकी है। प्रशासन ने सेना से इन सैनिकों के घर के स्थायी पते के साथ परिवार की सूची मांगी है ताकि राहत राशि के भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सके। उम्मीद है कि सेना से आज या कल सैनिकों के पते मिल जाएंगे। इसके बाद ही पता चलेगा कि इस दर्दनाक हादसे में मारे गए सैनिक कहां के थे। सरकार ने इस हादसे में मारे गए सभी सैनिकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की है। 

इन सैनिकों का स्थायी पता मिलने के बाद ही राहत राशि की प्रक्रिया शुरू होगी। मरने वाले सभी सैनिक बाहरी राज्यों के थे और मौके पर इनके परिजन न होने के कारण 20-20 हजार रुपए की फौरी राहत का भुगतान भी नहीं हो सका। प्रशासन 4-4 लाख रुपए की राहत राशि उनके परिवारों तक पहुंचाएगा। इसलिए प्रशासन ने सेना से इन सैनिकों के स्थायी पते मांगे हैं। यहां पर विदित रहे कि कुमारहट्टी के पास 14 जुलाई को 4 मंजिला भवन गिरने से एक महिला सहित 14 सैनिकों की मौत हो गई थी जबकि 17 सैनिकों सहित 28 लोग इसमें घायल हो गए थे। घायलों को प्रशासन ने मौके पर ही फौरी राहत प्रदान कर दी थी।

सूबेदार राजेन बहादुर का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

सोलन 6-सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. राजीव सैजल सूबेदार राजेन बहादुर को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए। कुमारहट्टी हादसे में मृतक सूबेदार राजेन बहादुर का बुधवार को धर्मपुर में पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। आसाम राइफल में सूबेदार राजेन बहादुर नेपाल के रहने वाले थे। सेना ने उनके पार्थिव शरीर को नेपाल न भेजकर धर्मपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया।

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