कांगड़ा में आस्था-पर्यटन का अनोखा संगम बना दक्षिण भारतीय शैली का मलाह माता सुक्राला मंदिर, पढ़ें जम्मू से आए पवित्र त्रिशूल की कहानी

Edited By Swati Sharma, Updated: 23 Mar, 2026 02:55 PM

kangra  malah mata sukrala temple has become a unique confluence of tourism

Kangra News : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बोह के पास स्थित रूलहेड़ गांव में विश्व कुलदेवी के रूप में पूजनीय मलाह माता सुक्राला को समर्पित एक भव्य मंदिर आस्था, वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम बनकर उभरा है।

Kangra News : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बोह के पास स्थित रूलहेड़ गांव में विश्व कुलदेवी के रूप में पूजनीय मलाह माता सुक्राला को समर्पित एक भव्य मंदिर आस्था, वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम बनकर उभरा है।

मंदिर का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना

मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय शर्मा के अनुसार, मंदिर का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। प्रकृति की गोद में स्थित यह मलाह माता सुक्राला मंदिर अपनी विशिष्ट दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली के कारण प्रदेश के पवित्र तीर्थस्थलों में अलग पहचान रखता है। इसकी जटिल नक्काशी, कलात्मक शिल्प कौशल और भव्य संरचना न केवल भक्तों बल्कि पर्यटकों को भी आकर्षित करती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गौतम ब्राह्मण वंश के पूर्वज माता सुक्राला का एक पवित्र त्रिशूल उनके विरावली (जम्मू) स्थित प्राचीन मंदिर से मंदिर स्थापित करने के इरादे से बोह लाए थे। हालांकि, उस समय यह योजना पूरी नहीं हो सकी। निर्माण की पहल बाद में पृथ्वीराज शर्मा ने की और और बाद में उनके पुत्र प्रकाश चंद शर्मा और विजय शर्मा ने स्थानीय भक्तों के सहयोग से इसे आगे बढ़ाया। अंतत: 2022 में मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ।

मंदिर की उत्कृष्ट शिल्प कौशल

इस मंदिर की एक उल्लेखनीय विशेषता इसका उत्कृष्ट शिल्प कौशल है। ओडिशा के कुशल कारीगरों ने यहां की सूक्ष्म नक्काशी की है, जबकि निर्माण में उपयोग किया गया पत्थर चंबा से लाया गया था, जो इस संरचना को एक आकर्षक दक्षिण भारतीय सौंदर्य प्रदान करता है जो इस क्षेत्र में दुर्लभ है। माता सुक्राला की दिव्य शक्तियों को उजागर करने वाली एक लोकप्रिय किंवदंती से यह मंदिर जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि जब चंबा के एक राजा ने एक बार माता के जम्मू स्थित मंदिर में उनकी शक्ति पर प्रश्न उठाया था, तो पास का एक सूखा लसोड़ा का पेड़ अचानक हरा-भरा हो गया, जिससे देवी के चमत्कारों में विश्वास और द्दढ़ हो गया। वर्तमान में, मंदिर में तीन पवित्र रूप-माता सुक्राला (लक्ष्मी रूप), माता काली और माता सरस्वती प्रतिष्ठित हैं। भक्त समृद्धि, शक्ति और ज्ञान का आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर में आते हैं। इसके आकर्षण को पास की बोह घाटी में एक सुंदर झरना बढ़ाता है, जो प्राकृतिक शांति के साथ आध्यात्मिक वातावरण को और निखारता है।

पर्यटन स्थल के रूप में भी तेजी से पहचान बना रहा यह स्थल

यह स्थल न केवल एक धार्मिक केंद्र के रूप में बल्कि एक उभरते हुए पर्यटन स्थल के रूप में भी तेजी से पहचान बना रहा है। रुलहेड (बोह) स्थित मलाह माता सुक्राला मंदिर आज भक्ति, संस्कृति, लोककथाओं और वास्तुकला के एक अछ्वुत मिश्रण का प्रतिनिधित्व करता है और कांगड़ा के मुख्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों के बीच एक अलग पहचान बनाने के लिए तैयार है।

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