Edited By Vijay, Updated: 11 Mar, 2026 11:32 PM

जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में चीड़ के पेड़ों के बड़े स्तर पर निजी भूमि में कथित अवैध कटान का मामला अब हाई प्रोफाइल बन गया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के गृह क्षेत्र में हुए इस अवैध कटान ने सत्ता और विपक्ष के गलियारों में हलचल मचा दी है।
नाहन (आशु): जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में चीड़ के पेड़ों के बड़े स्तर पर निजी भूमि में कथित अवैध कटान का मामला अब हाई प्रोफाइल बन गया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के गृह क्षेत्र में हुए इस अवैध कटान ने सत्ता और विपक्ष के गलियारों में हलचल मचा दी है। जैसे-जैसे मामले की परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे सियासी बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि चंद घंटों में कटर मशीनों की मदद से 307 पेड़ों का कटान कैसे हो गया? क्या बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर निजी भूमि में पेड़ों की कटाई संभव थी? जानकारों का कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह एक गलत परंपरा की शुरूआत बन सकती है।
पूर्व विधायक ने सोशल मीडिया पर सांझा किए थे ड्रोन शॉट्स
मामले ने तब तूल पकड़ा जब शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने अवैध कटान वाले इलाके के ड्रोन शॉट्स सोशल मीडिया पर सांझा किए। इन तस्वीरों में बड़ी संख्या में कटे हुए चीड़ के पेड़ दिखाई देने के बाद सनसनी फैल गई। वहीं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी सरकार को घेरते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो सत्ता में वापसी के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। करीब एक सप्ताह से सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला लगातार गर्माया हुआ है। अब इस मुद्दे में एबीवीपी भी कूद पड़ी है, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।
2–3 घंटे में काट दिए गए 307 पेड़
वन विभाग की मानें तो यह कथित अवैध कटान शिलाई में पैट्रोल पंप के समीप निजी भूमि पर हुआ। संबंधित व्यक्ति को पहले 25 चीड़ के पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह अनुमति भी समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद 5 मार्च को दिन-दिहाड़े मात्र 2 से 3 घंटे के भीतर कटर मशीनों की मदद से 307 पेड़ों को काट दिया गया। कटे हुए पेड़ों में 306 चीड़ के पेड़ और एक अन्य श्रेणी का पेड़ शामिल है। फिलहाल कटे हुए पेड़ों को वन विभाग छोटे-छोटे लॉग में काटकर कब्जे में ले रहा है।
वन खंड अधिकारी और वन रक्षक निलंबित
बढ़ते दबाव के बीच वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र के वन खंड अधिकारी (बीओ) और एक फोरैस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया है। साथ ही उनका मुख्यालय रेणुका जी निर्धारित किया गया है। निलंबित कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। वहीं कथित अवैध कटान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिलाई पुलिस थाना में केस भी दर्ज करवाया जा चुका है। पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलने के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में विभागीय टीम ने अगले ही दिन मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने कुल 307 कटे हुए पेड़ों को चिन्हित किया। इस हाई प्रोफाइल प्रकरण को देखते हुए अब बड़े स्तर पर जांच के संकेत भी मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पूरे मामले की जांच किसी अन्य डिवीजन के डीएफओ स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में करवाई जा सकती है। माना जा रहा है कि इस मामले में विभाग के कुछ अन्य कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
पहले भी गूंजा था देवदार कटान का मामला
जानकार बताते हैं कि करीब 22-23 वर्ष पहले भी सिरमौर के राजगढ़ वन मंडल में देवदार के पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया था, जिसने उस समय प्रदेश भर में खासा तूल पकड़ा था। मामला इतना गंभीर हो गया था कि इसे विधानसभा में भी उठाया गया। विधानसभा में मामला पहुंचने के बाद सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था। इसके बाद संबंधित वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) को निलंबित कर दिया गया था और पूरे प्रकरण की जांच भी करवाई गई थी।
क्या कहते हैं डीएफओ
श्री रेणुका जी वन मंडल के डीएफओ बलदेव राज ने बताया कि शिलाई क्षेत्र में अवैध कटान के मामले में संबंधित वन खंड अधिकारी और वन रक्षक को निलंबित कर दिया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे भी जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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