हिमाचल वालों सावधान! फ्रूट जेली में फल गायब, फेल सैंपल... लैब रिपोर्ट ने खोली पोल

Edited By Jyoti M, Updated: 06 Jan, 2026 12:08 PM

himachal pradesh fruit missing from fruit jelly sample fails test

औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में मासूम बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिस रंग-बिरंगी 'फ्रूट जेली' को बच्चे बड़े चाव से खा रहे थे, लैब की जांच में वह पूरी तरह से 'फर्जी' निकली है। कंडाघाट स्थित कंपोजिट टेस्टिंग लैब (CTL)...

हिमाचल डेस्क। औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में मासूम बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिस रंग-बिरंगी 'फ्रूट जेली' को बच्चे बड़े चाव से खा रहे थे, लैब की जांच में वह पूरी तरह से 'फर्जी' निकली है। कंडाघाट स्थित कंपोजिट टेस्टिंग लैब (CTL) की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि इस जेली में फलों का नामोनिशान तक नहीं है, जबकि इसे शुद्ध फ्रूट प्रोडक्ट बताकर बेचा जा रहा था।

स्वाद के पीछे छिपा सेहत का 'जहर'

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने हाल ही में बद्दी की एक प्रतिष्ठित मिठाई की दुकान पर छापेमारी की थी। विभाग को शक था कि दुकान में बिक रही जेली मानकों पर खरी नहीं है। जब सैंपल की विस्तृत जांच की गई, तो रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। पैकेट पर जिन सामग्रियों (Ingredients) का दावा किया गया था, वे डिब्बे के अंदर नदारद मिले। विभाग ने इस उत्पाद को 'मिस-ब्रांडेड' और 'भ्रामक' (Misleading) की श्रेणी में डालकर प्रतिबंधित कर दिया है।

खुद की फैक्ट्री में चल रहा था नकली खेल

जांच में एक और डराने वाली बात सामने आई है। दुकानदार किसी कंपनी से माल खरीदने के बजाय अपने ही कारखाने में बिना किसी मापदंड के यह जेली तैयार कर रहा था। यह असुरक्षित उत्पाद न केवल उसकी अपनी दुकान, बल्कि क्षेत्र की कई छोटी दुकानों और रेहड़ियों तक भी सप्लाई किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग अब उन तमाम जगहों की तलाश कर रहा है जहाँ यह खेप भेजी गई थी।

विभाग की सख्त कार्रवाई: 10 लाख तक का जुर्माना संभव

खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनुज शर्मा और उनकी टीम ने इस धोखाधड़ी को गंभीरता से लिया है। नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

नोटिस जारी: संबंधित कारोबारी को कारण बताओ नोटिस भेजकर 30 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

दस्तावेज की मांग: व्यापारी को अपने लाइसेंस और निर्माण संबंधी सभी कागजात पेश करने के आदेश दिए गए हैं।

आर्थिक दंड: नियमों के मुताबिक, भ्रामक जानकारी देकर जनता को गुमराह करने पर 10 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है।

"बच्चों के खाद्य पदार्थों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फ्रूट जेली का सैंपल पूरी तरह फेल रहा है। हमने नोटिस जारी कर दिया है और संतोषजनक जवाब न मिलने पर सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा।" — डॉ. अतुल कायस्थ, सहायक आयुक्त, जिला खाद्य सुरक्षा विभाग

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