हाजिरी लगाकर रफूचक्कर हुए गुरुजी, निरीक्षण के दौरान खुली पोल; अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश

Edited By Swati Sharma, Updated: 13 Feb, 2026 05:03 PM

himachal school inspection reveal that guruji left after marking his attendance

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के शीतकालीन स्कूलों में 42 दिनों की छुट्टियों के बाद गुरूवार से नए शिक्षा सत्र का आगाज हुआ। सत्र के पहले ही दिन स्कूलों की व्यवस्था जांचने निकले प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक राजीव ठाकुर के औचक निरीक्षण में गंभीर लापरवाही का...

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के शीतकालीन स्कूलों में 42 दिनों की छुट्टियों के बाद गुरूवार से नए शिक्षा सत्र का आगाज हुआ। सत्र के पहले ही दिन स्कूलों की व्यवस्था जांचने निकले प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक राजीव ठाकुर के औचक निरीक्षण में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। शिक्षा खंड नारग के तहत मरयोग स्कूल में एक जेबीटी शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर में हाजिरी लगाने के बावजूद स्कूल से गायब मिले।

हाजिरी दर्ज, पर शिक्षक नदारद

निरीक्षण के दौरान उपनिदेशक उस समय हैरान रह गए जब मरयोग स्कूल के रिकॉर्ड में एक जेबीटी शिक्षक की हाजिरी तो लगी थी, लेकिन वे मौके पर मौजूद नहीं थे। जांच करने पर न तो शिक्षक की कोई छुट्टी की अर्जी मिली और न ही उनके फील्ड ड्यूटी पर होने का कोई आधिकारिक आदेश। इस 'अनुशासनहीनता' पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उपनिदेशक ने दोषी शिक्षक के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

उपनिदेशक ने खाली बेंच देख जताई नाराजगी

सिर्फ शिक्षकों की लापरवाही ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की बेहद कम उपस्थिति ने भी विभाग की चिंता बढ़ा दी है। उपनिदेशक ने राजगढ़ और नारग खंड के विभिन्न स्कूलों का दौरा किया, जहां स्थिति कुछ इस प्रकार रही। दुधम मतियाना प्राथमिक स्कूल में 34 में से केवल 11 विद्यार्थी उपस्थित थे। वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल (दुधम मतियाना) में 91 में से मात्र 28 छात्र पहुंचे थे, जबकि मरयोग स्कूल में 10 में से केवल 2 बच्चे मौजूद थे। दाड़ो देवरिया स्कूल में भी 36 में से 19 विद्यार्थी ही आए।

अभिभावकों को प्रेरित करने के निर्देश

उपनिदेशक राजीव ठाकुर ने बताया कि निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों का मार्गदर्शन करना था ताकि पढ़ाई के पहले दिन से ही छात्र नियमित रूप से स्कूल आएं। उन्होंने स्कूल प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे अभिभावकों से संपर्क करें और उन्हें बच्चों को रोजाना स्कूल भेजने के लिए जागरूक करें।

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