Edited By Swati Sharma, Updated: 10 Feb, 2026 11:09 AM

Shimla News: राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से हिमाचल प्रदेश सरकार को सब्सिडी वापस लेने, पिछले दो साल से रिक्त पड़े पदों को समाप्त करने और महंगाई भत्ते (डीए) व महंगाई राहत बकाया की किस्तों पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। एक वरिष्ठ...
Shimla News: राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से हिमाचल प्रदेश सरकार को सब्सिडी वापस लेने, पिछले दो साल से रिक्त पड़े पदों को समाप्त करने और महंगाई भत्ते (डीए) व महंगाई राहत बकाया की किस्तों पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर रविवार को वित्त विभाग द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, आरडीजी वापस लिए जाने से राज्य सरकार को कई सख्त फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसमें पिछले दो वर्षों से रिक्त पदों को खत्म करना, संस्थानों में कम से कम 30 प्रतिशत की छंटनी या उन्हें बंद करना और नए वेतन आयोग व वेतन संशोधन को रोकना शामिल है।
वित्त विभाग ने दिए ये संकेत
वित्त विभाग के प्रमुख सचिव देवेश कुमार द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरण में संकेत दिया गया कि आरडीजी के नुकसान से हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी के साथ-साथ राशन, बिजली, पानी और कूड़े के बिलों पर दी जाने वाली रियायतें भी खत्म हो सकती हैं। हालांकि, ये केवल वित्त विभाग द्वारा दी गई सिफारिशें थीं और अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि 37,199 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आरडीजी को वापस लेने से हिमाचल प्रदेश के वार्षिक बजट पर गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि राज्य के बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा इसी अनुदान से आता है।