Himachal: पुल बहे, सड़कें गायब, तबाही देख दंग रह गई केंद्रीय टीम, पूरी तरह से खतरे में सोलंग गांव

Edited By Jyoti M, Updated: 09 Sep, 2025 01:32 PM

himachal central team stunned to see the devastation

हाल ही में बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भारी तबाही मचाई है। इस तबाही का जायज़ा लेने के लिए गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव जी पार्थसारथी की अगुआई में एक छह सदस्यीय केंद्रीय टीम कुल्लू पहुंची। टीम...

हिमाचल डेस्क। हाल ही में बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भारी तबाही मचाई है। इस तबाही का जायज़ा लेने के लिए गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव जी पार्थसारथी की अगुआई में एक छह सदस्यीय केंद्रीय टीम कुल्लू पहुंची। टीम ने मनाली और उसके आस-पास के इलाकों में हुए नुकसान को देखकर गहरी हैरानी जताई।

आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा

केंद्रीय टीम रविवार रात को कुल्लू पहुंची और सोमवार सुबह जिला उपायुक्त तोरुल एस रवीश के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। उपायुक्त ने टीम को जिले में हुए नुकसान का विस्तृत ब्यौरा दिया। इसके बाद टीम ने मनाली के बाहंग और सोलंग गांवों का दौरा किया। टीम के सदस्यों को ऊबड़-खाबड़ और जाम वाली सड़कों से गुज़रना पड़ा, जिससे उनकी यात्रा काफी मुश्किल रही। अलेउ पहुंचने पर, उन्होंने फोरलेन सड़क का एक बड़ा हिस्सा गायब देखा, जो बाढ़ के पानी में बह गया था।

सोलंग गांव में ग्रामीणों से बातचीत

मनाली पहुंचने पर, सड़क की खराब हालत को देखते हुए टीम को इनोवा की जगह छोटी जिमनी गाड़ियों में बैठाकर आगे भेजा गया। टीम ने मनालसु नाले का निरीक्षण किया, जहाँ कई दुकानें, मकान और पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे। उन्होंने इन जगहों की तस्वीरें भी लीं और अधिकारियों ने नदी में ड्रेजिंग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

दोपहर में, टीम सोलंग गांव पहुंची, जहां उन्होंने ग्रामीणों से बात की। ग्रामीणों ने बताया कि उनका गांव, जो पहले आग से प्रभावित हुआ था, अब इस आपदा के कारण पूरी तरह से खतरे में है। 70 घरों में से चार पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं, और बाकी भी खतरे की जद में हैं। ग्रामीणों ने सरकार से गांव को सुरक्षित करने की गुहार लगाई।

इनर अखाड़ा बाज़ार का दौरा

टीम ने कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार का भी दौरा किया, जो भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस हादसे में 12 लोग मलबे में दब गए थे, जिनमें से तीन घायल हैं, सात के शव मिल चुके हैं और दो अभी भी लापता हैं। स्थानीय निवासी घनश्याम ने बताया कि यह हादसा उचित निकासी व्यवस्था न होने के कारण हुआ। लोगों ने अपनी समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन भी टीम को सौंपा।

सरकारी संपत्तियों का निरीक्षण

इस दौरे के दौरान, टीम ने ज्यादातर सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने वशिष्ठ चौक, पतलीकूहल, छरुडू और लंकाबेकर जैसे इलाकों का भी निरीक्षण किया। इसके बाद टीम ने सुमा में जलशक्ति विभाग की क्षतिग्रस्त पेयजल योजना का भी निरीक्षण किया।

इस टीम में जी पार्थसारथी के अलावा, केंद्रीय जल निगम एवं जलशक्ति मंत्रालय के निदेशक वसीम अशरफ, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुख्य अभियंता अनिल कुमार कुशवाहा, हिमाचल सरकार के संयुक्त सचिव (डिजास्टर मैनेजमेंट) निशांत ठाकुर, एचआरटीसी के कार्यकारी निदेशक मुरारी लाल और टीसीबी स्पेशलिस्ट डॉ. कृष्ण चंद शामिल थे।

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