हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 100 प्रतिशत से अधिक रही कार्य उत्पादकता

Edited By Swati Sharma, Updated: 02 Apr, 2026 06:45 PM

himachal assembly s budget session adjourned indefinitely

HP Assembly : हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। दो चरणों में चले इस सत्र के दौरान कुल 16 बैठकों में विभिन्न विधायी कार्यों और नीतिगत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। सत्र की शुरुआत 16 फरवरी को राज्यपाल के...

HP Assembly : हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। दो चरणों में चले इस सत्र के दौरान कुल 16 बैठकों में विभिन्न विधायी कार्यों और नीतिगत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। सत्र की शुरुआत 16 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ हुई थी, जिसमें सरकार का नीतिगत एजेंडा रखा गया। इसके बाद 18 फरवरी को राजस्व घाटा अनुदान बहाल करने का प्रस्ताव पारित किया गया। बीच में अल्प विराम के बाद सत्र की कार्यवाही 18 मार्च से पुन: शुरू हुई।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का आम बजट पेश किया, जिसे गहन चर्चा के बाद 30 मार्च को पारित कर दिया गया। सत्र के दौरान विधायी जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया। प्रश्नकाल के दौरान सरकार ने कुल 617 सवालों (471 तारांकित और 146 अतारांकित) के जवाब दिए। विभिन्न संसदीय नियमों के तहत जनहित के अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें नियम 61 के तहत चार, नियम 62 के तहत दो और नियम 67, 101, 130 व 324 के तहत एक-एक चर्चा शामिल रही। शून्यकाल के दौरान भी सदस्यों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों और राज्य से जुड़े 94 महत्वपूर्ण विषय उठाए। विधायी कार्यों की बात करें तो इस सत्र में लगभग नौ सरकारी विधेयक पेश किए गए और चर्चा के बाद उन्हें पारित किया गया। इसके अलावा, सदन के पटल पर विभिन्न समितियों की 60 रिपोर्टें रखी गईं।

सत्र के दौरान पूर्व विधायक भगत राम चौहान को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई, जिनका इसी वर्ष जनवरी में निधन हो गया था। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 649 छात्रों ने भी सदन की कार्यवाही देखी। कुल मिलाकर, लगभग 90 घंटे तक चली सदन की कार्यवाही की उत्पादकता 100 प्रतिशत से अधिक रही। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बेहतर समन्वय के चलते विधायी कार्यों का निष्पादन उच्च स्तर पर रहा। 

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